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नेत्रहीन समाजसेवी चेन ग्वांगचेंग फरार

नेत्रहीन समाजसेवी चेन ग्वांगचेंग फरार

बीजिंग. 29 अप्रैल 2012 बीबीसी

चेन ग्वांगचेंग

 

चीन में दृष्टिहीन सरकार विरोधी मानवाधिकार कार्यकर्ता चेन ग्वांगचेंग के अधिकारियों को चकमा देकर घर से भाग जाने के बाद, चीन के अधिकारियों ने उनके कई रिश्तेदारों और सहयोगियों को गिरफ्तार करना शुरु कर दिया है.

पिछले हफ्टे नाटकीय ढंग से ग्वांगचेंग वर्ष 2010 से घर पर नजरबंद किए जाने के बावजूद अधिकारियों को चकमा देकर भाग निकले और माना जा रहा है कि कुछ सहयोगियों की मदद से वे अब बीजिंग में अमरीकी दूतावास में हैं. उधर उनकी मदद करने वाले अनेक लोगों को या तो हिरासत में ले लिया गया है या फिर वे हाल में 'लापता' हो गए हैं. उनके एक सहयोगी हू जिया को हिरासत में ले लिया गया है और उनसे पूछताछ हो रही है.

बीजिंग में बीबीसी संवाददाता मार्टिन पेशेंस के अनुसार, "ये ताजा कार्रवाई अधिकारियों की ओर की जा रही उस व्यापक अभियान का हिस्सा प्रतीत होती है जिसके तहत ग्वांगचेंग के भाई और भतीजे को पुलिस ने इसलिए हिरासत में लिया है क्योंकि उन्होंने उन्हें भागने में मदद की थी."

शुक्रवार को ग्वांगजेंग ने एक वीडियो संदेश के जरिए चीन के प्रधानमंत्री से अपील की थी कि वे उनके परिवार को बदले की कार्रवाई से बचाएँ. अमरीकी और अन्य अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थाओं ने लगातार ग्वांगचेंग के परिवार के सदस्यों के साथ किए जा रहे बर्ताव पर चिंता जताई है.

अमरीका के लिए ग्वांगचेंग प्रकरण से मुश्किलें खड़ी हो गई हैं. अगले हफ्ते अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन, जो पहले उनकी रिहाई की मांग करती आई हैं, बीजिंग पहुँच रही हैं. ये उनकी पूर्वनिर्धारित यात्रा है. फिलहाल अमरीकी सरकार ने सार्वजनिक तौर पर इस मुद्दे पर कोई बयान नहीं दिया है लेकिन क्लिंटन की यात्रा के दौरान संभावना है कि ये मुद्दा अमरीका-चीन बातचीत में छाया रहेगा.

यदि ग्वांगचेंग अमरीकी दूतावास में ही हैं तो ये 1989 की उस घटना की याद ताजा कर देगा जब एक अन्य प्रमुख कार्यकर्ता फांग लिजही ने भाग कर अमरीकी दूतावास में शरण ले ली थी. वे वहाँ लगभग एक साल तक रहे थे. ग्वांगचेंग प्रमुखता में तब आए जब उन्होंने चीन की एक-शिशु की नीति में हो रही अनियमितताओ के बारे में आवाज उठाई. उन्होंने बताया कि किस तरह लिनयी और शैन्डॉंग प्रांतों में इस नीति के तहत हजारों महिलाओं को भ्रूण हत्या करने पर मजबूर किया गया.

उन्हें 2010 में घर पर नजरबंद किया गया था. इससे पहले वे ट्रैफिक रोकने और संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के आरोपों के तहत चार साल की जेल की सजा काट चुके थे. उनके सहयोगियों का कहना है कि उनके भागने की कई महीनों तक योजना बनाई गई और इसे कई दोस्तों और सहयोगियों ने अंजाम दिया. उनके घर को आसपास अधिकारियों द्वारा बनाई गई दीवार को फांद कर ग्वांगचेंग घर के आसपास के इलाके में छिप गए और फिर एक महिला मित्र ने लगभग 300 किलोमीटर तक गाड़ी चलाकर उन्हें बीजिंग पहुँचाया.

वहाँ वे कभी एक तो कभी दूसरे कार्यकर्ता के घर पर टिके और फिर माना जाता है कि उन्हें अमरीकी दूतावास पहुँचाया गया और अब भी वे वहीं हैं. उनकी पत्नी और छह वर्षीय बच्ची अब भी घर पर नजरबंद हैं. लेकिन उनके परिवार के कई सदस्यों को हिरासत में ले लिया गया है. कई अन्य रिश्तेदारों की खोज रही है. ग्वांगचेंग की सहयोगी ही पियरॉंग ने माक्रोब्लाग लिखकर बताया कि उन्होंने गाड़ी पर ग्वांगचेंग को बीजिंग पहुँचाया है. माना जा रहा है कि ही पियरॉंग को नैनजिंग में हिरासत में ले लिया गया है.

अमरीका स्थित चाइनाएड संस्था के बॉब फू का कहना था कि वे उनसे बातचीत कर रहे थे जब अमरीकी खुफिया पुलिस ने छापा मारा. बॉब फू के अनुसार ही पियरॉंग ने कहा कि बीएलसबी यानी पब्लिक सिक्यूरिटी ब्यूरो वाले पहुँच गए हैं. बाद में ही पियरॉंग का माक्रोब्लॉग डिलीट कर दिया गया और सभी लोकप्रिय साइटों पर चेन ग्वांगचेंग के नाम की सर्च लगाने पर आने वाले नतीजों को सेंसर्स ने ब्लॉक कर दिया.

शनिवार को अधिकारियों ने हू जिया को भी हिरासत में ले लिया. उन्होंने बीबीसी को बताया था कि भागने के बाद ग्वांगचेंग उन्हें मिले थे. हू जिया ने बीबीसी को बताया था - "चेन ग्वांगचेंग ने खासे समय से भागने की योजना बनाई हुई थी. उन्होंने एक सुरंग खोदने की कोशिश की लेकिन नाकाम रहे. उन्होंने दिन के समय बाहर आना बंद कर दिया ताकि गार्ड ये सोचें कि वे कभी दिन के समय बाहर नहीं आते हैं. ऐसा करने के बाद उन्होंने दीबार फांदी और सुरक्षाकर्मियों को पता नहीं चला."

हू जिया के मुताबिक, "वे चीन में मानवाधिकारों के प्रतीक हैं. उन्होंने सेंसरशिप और नजरबंदी के बावजूद बाहर की दुनिया को बताया कि चीन में असल में क्या हो रहा है. उन्होंने अधिकारियों के उस दावे को झुठलाया कि समाज में सौहार्द और स्थिरता है..."

ग्वांगचेंग ने एक वीडियो के जरिए चीन के प्रधानमंत्री वेन जियाबाओ से सीधे अपील की थी और कहा था कि उन्हें और उनकी पत्नी को स्थानीय अधिकारियों ने पीटा था और उनके परिवार को फिर प्रताड़ना का सामना करना पड़ सकता है.

हॉंगकॉंग में ह्यूमन राइट्स वॉच के निकोलास बेकलिन ने बीबीसी के न्यूज आर कार्यक्रम को बताया, "वो केंद्र सरकार से अपील करने की कोशिश कर रहे हैं. वो ये इसके बावजूद कर रहे है कि केंद्र सरकार इस मामले के बारे में जानती है और शायद उसी ने स्थानीय अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि उन्हें चुप करा दिया जाए. स्पष्ट नहीं है कि केंद्र सरकार कैसी प्रतिक्रिया देगी. आम तौर पर वे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की बात मानकर कोई उदाहरण नहीं पेश करना चाहते क्योंकि वे ग्रामीण इलाकों में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की ओर से ज्यादतियों के सबूत एकत्र किए जाने से चिंतित रहते हैं."


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