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रामदेव के साथ खड़े हुये अन्ना

रामदेव के साथ खड़े हुये अन्ना

नई दिल्ली. 3 मई 2012

बाबा रामदेव


देश के सांसद भले बाबा रामदेव द्वारा अपने को शैतान, हैवान और अपराधी कहे जाने से नाराज हों, समाजसेवी अन्ना हजारे बाबा रामदेव के साथ हैं. अन्ना हजारे ने कहा है कि योगगुरु ने कुछ भी गलत नहीं कहा है.

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ के दुर्ग से शुरु हुई अपनी यात्रा के दौरान बाबा रामदेव ने सांसदों पर जम कर हमला बोला था. बाबा रामदेव ने कहा था कि संसद में बैठे कुछ लोग रोगी, जाहिल और लुटेरे हैं. बाबा रामदेव ने सांसदों को हत्यारा तक करार देते हुए कहा कि संसद में बैठे लोग इंसान के रूप में शैतान-हैवान हैं. बाबा रामदेव ने सांसदों पर हमला बोलते हुये कहा था कि 543 रोगी हिंदुस्तान चला रहे हैं. हमने उन्हें कुर्सी पर बैठा दिया है. लेकिन उन्हें कुर्सी पर बैठने का अधिकार नहीं है. लेकिन देश चल रहा है. हमने ऐसा ही सिस्टम बनाया है. बेईमान, भ्रष्ट लोगों से संसद को भी बचाना है. बाबा रामदेव के ऐसे विशेषणों से नाराज सांसदों ने बाबा रामदेव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. दूसरी ओर लोकसभा की ओर से बाबा रामदेव के खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस जारी किया गया है.

बाबा रामदेव के इस बयान और सांसदों द्वारा उसके विरोध के बीच अन्ना हजारे रामदेव के समर्थन में खड़े हो गये हैं. अन्ना हजारे ने कहा कि रामदेव ने जो कुछ भी कहा उसमें कुछ भी गलत नहीं है. आज कई लोगों के खिलाफ सबूत हैं। जब पार्टी टिकट देती है तो वे दागदार व्यक्ति को क्यों देती हैं?

अन्ना हजारे ने राजनीतिक दलों पर निशाना साधते हुये कहा कि पार्टियां केवल वोट के बारे में सोचती हैं. वे यह नहीं सोचती कि जिन्हें वे खड़ा कर रही हैं वे अपराधी हैं. लोकतंत्र के मंदिर का क्या होगा अगर वहां ऐसे लोग प्रवेश करेंगे.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

kuldeep sehdev [] ludhiana - 2012-05-03 09:00:51

 
  बाबा रामदेव के सत्यकथन पर,अपने राजनितिक विद्वेषों को भूलकर, देश के शीर्षस्थ चोर,डाकू,लुटेरे,व्यभिचारी,कातिल ,भ्रष्टाचारी और देशद्रोही एक होकर चिल्लाने लगे हैं,कहते हैं कि देश का संविधान किसी को भी सांसद का अपमान करने कि आज्ञा नहीं देता .तो क्या हमारा संविधान इन बेगैरत और बेईमान सांसदों को यह हक़ देता है कि वे लोगों से झूठे वायदे करके चुनाव जीतें और उनके साथ विश्वासघात करें,देश को दोनों हाथों से लूटें ,संसद में गाली गलोच करें और जूते-चप्पल चलायें,गुपचुप तरीके से देश के संसाधनों को लूटने के लिए जनविरोधी कानून बनायें,तथाकथित कानून के मंदिरों अर्थात न्यायलय परिसरों में व्यभिचार करें ,व्यभिचारिनियों को छोटी से लेकर शीर्ष अदालतों की जज बनाएं और ऐसी ही जजों द्वारा अपने पापों को छुपाने के लिए अपने हक़ में फैसले दिलवाएं, संसद और अदालतों की अवमानना का भय दिखलाकर देश की जनता का मुंह बंद करें और उसकी खून पसीने की कमाई को लूटकर विदेशों में जमा करें, खुद के लिए सब कुछ मुफ्त में हासिल करें और आम जनता को महंगाई की चक्की में पिसने के लिए छोड़ दें. संसद में खड़े होकर बेशर्मी से किसी की भी पगड़ी उछालें लेकिन यदि कोई और इनको आईना दिखाए तो उसपर पागल कुत्तों की तरह झपट पड़ने का हक़ किस संविधान ने दिया है इन को ? 
   
 

brijmohan [] agra - 2012-05-03 07:11:36

 
  बाबा रामदेव और अन्ना जी से निवेदन.. जनता द्वारा निर्वाचित प्रतिनिधियों को गाली देने से देश मं आराजकती ही फैलेगी. लोकपाल से पहले चुनाव सुधार बिल की मांग करें ताकि कोई अपराधी और भ्रष्टाचारी संसद के पवित्र मंदिर में प्रवेश न कर सके.  
   
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