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नरेंद्र मोदी पर चलना चाहिये मुकदमा

नरेंद्र मोदी पर चलना चाहिये मुकदमा

अहमदाबाद. 7 मई 2012

नरेंद्र मोदी

 

गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के अमाइकस क्यूरी राजू रामचंद्रन खुल कर सामने आ गये हैं. उन्होंने कहा है कि गुजरात दंगों में एसआईटी द्वारा नरेंद्र मोदी को क्लिन चिट दिया जाना सही नहीं है और 2002 कि गुजरात दंगों के लिये मोदी पर भारतीय दंड संहिता के तहत मुकदमा चलना ही चाहिए

सोमवार को मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट एम. एस. भट की अदालत में एसआईटी ने गुलबर्ग सोसाइटी दंगे की रिपोर्ट जाकिया जाफरी को सौंपी, जिसमें राजू रामचंद्रन की टिप्पणी भी शामिल है. अदालत ने पिछली कार्रवाई के समय एसआईटी को निर्देश दिया था कि वह जाकिया जाफरी को पूरी रिपोर्ट सौंपे.
अदालत को सौंपी अपनी रिपोर्ट में राजू रामचंद्रन ने कहा है कि वह एसआईटी की रिपोर्ट से सहमत नहीं हैं. रामचंद्रन ने अपनी राय देते हुये कहा है कि गुजरात दंगों में मोदी की भूमिका के लिए उनके खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा चलाया जाना चाहिए.

ज्ञात रहे कि 2002 के गुजरात दंगों में गुलबर्ग सोसायटी जनसंहार में जाफरी सहित 37 लोग मारे गए थे. उग्र भीड़ ने अहमदाबाद के करीब स्थित गुलबर्ग सोसायटी के मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाया था और उन्हें आग के हवाले कर दिया था. पूर्व सांसद एहसान जाफरी की मौत के बाद उनकी पत्नी जाकिया जाफरी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. इसके बाद कोर्ट ने मामले में राजू रामचंद्रन को एमिकस क्यूरी यानी न्याय मित्र नियुक्त किया था.

इससे पहले सितंबर में सर्वोच्च न्यायालय ने निचली अदालत को 2002 के गुजरात दंगों के दौरान हुए गुलबर्ग सोसायटी नरसंहार मामले में जाकिया की याचिका पर सुनवाई करने का निर्देश दिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यह मजिस्ट्रेट पर निर्भर करता है कि वह दंगे मामले में मोदी और 63 अन्य के खिलाफ अदालती कार्यवाही आगे बढ़ाते हैं या नहीं. सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि वह अब इस मामले की जांच पर आगे से निगरानी नहीं रखेगी.

इसके बाद हाल ही में एसआईटी ने गुजरात दंगों पर अपनी रिपोर्ट पेश की थी. जिसकी कॉपी सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और कुछ और लोगों ने अदालत से मांगी थी. लेकिन एसआईटी ने इसका विरोध किया था. फरवरी में इस मामले की सुनवाई करते हुये अदालत ने एसआईटी रिपोर्ट जाकिया जाफरी या तीस्ता सितलवाड़ को देने से मना कर दिया था. अदालत का कहना था कि अभी रिपोर्ट पूरी तरह से पेश नहीं हुई है, इसलिए इसे जकिया जाफरी को नहीं दिया जा सकता. बाद में अदालत ने जाकिया जाफरी को रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिये.


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