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आतंकियों को पाकिस्तान ने छुपाया-हिलेरी

आतंकियों को पाकिस्तान ने छुपाया-हिलेरी

कोलकाता. 7 मई 2012

हिलेरी क्लिंटन

 

अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन ने कोलकाता में कहा है कि पाकिस्तान ने आतंकवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई में भारत या अमरीका के स्तर का मुकाबला नहीं किया है. हिलेरी ने आरोप लगाया कि अल कायदा के नेता अयमन अल जवाहिरी पाकिस्तान में छुपे हो सकते हैं.

कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम में हिलेरी क्लिंटन ने कहा कि अमरीका जानता है कि पाकिस्तान की सरकार ने अभी हाफिज सईद को अदालत में दोषी ठहराए जाने के विषय पर कदम नहीं उठाए हैं और अमरीका पाकिस्तान को इसका एहसास दिलाता रहेगा.

हिलेरी ने कहा कि जो लोग आपको मारने की कोशिश कर रहे हैं, आपको उन्हें खोज निकालना होगा. इस पर ध्यान केंद्रित होना चाहिए. हम मुंबई हमलों से जुड़े हर किसी व्यक्ति को न्याय के कटघरे में खड़ा करना चाहते हैं. हम भारतीयों के साथ खड़े हैं और ऐसा करने की कोशिश कर रहे हैं.

अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा कि हम अल कायदा को निष्क्रीय करना चाहते हैं. हमें काफी सफलता मिली है. कई प्रमुख नेता अभी भगोड़े हैं. हमारा मानना है कि बिन लादेन के बाद नेतृत्व संभालने वाले ज्वाहिरी पाकिस्तान में हैं और हम उन्हें खोजना चाहते हैं. पाकिस्तान ने अमरीका या भारत के मुकाबले अधिक लोग खोए हैं. आतंकवादी हमलों में ही 30 हजार से अधिक पाकिस्तानी लोग मारे गए हैं. ये पाकिस्तान के हित में है कि वह इस समस्या का सामना करे.

हिलेरी ने कहा कि वक्त बीतने के साथ भारत अपने दरवाजें जितना खोलेगा उतने ही विकास और बेहतरी के अवसर यहां आएंगे. मै इस विश्वास के साथ यहां आई हूं कि भारत कही भी और किसी से भी प्रतियोगिता कर सकता है. लेकिन मै राजनीति भी समझती हूं, जानती हूं कि ये फैसले कितने कठिन हो सकते है. उन्होंने कहा कि उत्पादों के वितरण से जुड़ी प्रक्रिया में अमरीका अपना अनुभव भारत के साथ बांट सकता है. छोटे-बड़े उत्पादकों से रिश्ते बनाने में भी अमरीका मदद कर सकता है. हमें सभी के लिए फायदे की स्थिति बनानी होगी.

ईरान के मुद्दे पर हिलेरी ने कहा कि ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम से इसराइल को खतरा है. हम ईरान पर दबाव बनाकर परमाणु हथियार बनाने के उसके इरादे को बदलना चाहते थे. ईरान पहले ही अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर चुका है. उसने परमाणु अप्रसार संधि पर भी हस्ताक्षर नहीं किए है. उन्होंने कहा कि ईरान पर इसी दबाव को बनाए रखने के लिए भारत, चीन, जापान और यूरोपीय संघ से कहा जा रहा है कि वो ईरान से तेल आयात कम करें. तेल की जरूरतें पूरी करने के लिए सउदी अरब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल का निर्यात बढ़ा रहा है.


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