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जॉन अब्राहम की सजा बरकरार

जॉन अब्राहम की सजा बरकरार

मुंबई. 8 मई 2012

जॉन अब्राहम


अभिनेता जॉन अब्राहम द्वारा दो लोगों को अपनी गाड़ी से कुचलने के मामले में मुंबई हाईकोर्ट ने निचली अदालत की सजा को बरकरार रखा है. हालांकि अदालत ने जॉन को प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट के तहत रिहा कर दिया है. इससे पहले इस मामले के शिकायतकर्ताओं ने अदालत में हलफनामा दिया था कि अगर अदालत चाहे तो जॉन इब्राहम की सजा को माफ कर सकती है क्योंकि अदालत से बाहर जॉन के साथ हमारा समझौता हो चुका है.

गौरतलब है कि 2006 में लापरवाही से अपनी बाइक चलाकर जॉन अब्राहम ने दो लोगों को घायल कर दिया था. इस मामले में उन्हें तत्काल जमानत मिल गई थी. लेकिन जब मामला अदालत में पहुंचा तो निचली अदालत ने जॉन अब्राहम को खराब तरीके से ड्राइविंग करने का अपराधी माना. इसके बाद बांद्रा मैट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट ने अक्तूबर 2010 में जॉन को लापरवाही से गाड़ी चलाने के मामले में 15 दिन की सज़ा सुनाई थी.

इस मामले में जॉन अब्राहम ने सेशन कोर्ट में जब जमानत याचिका दायर की तो उस याचिका को खारिज करते हुये सेशन जज एनवी नावखर ने निचली अदालत के फैसले पर मुहर लगा दी. इसके बाद जॉन अब्राहम को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था. बाद में मुंबई हाइकोर्ट ने उनकी सजा को स्थगित करते हुए 20 हज़ार के निजी मुचलके पर जमानत दे दी थी.

सोमवार को इस मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति आर. सी. चव्हाण ने कहा कि यह देखना चालक की जिम्मेदारी है कि वाहन उसके नियंत्रण में है ताकि ऐसी अचानक दुर्घटनाओं से बचा जा सके. इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि सजा देने का निचली अदालत का फैसला गलत था. सजा को दरकिनार करने का कोई आधार नहीं है. अदालत ने टिप्पणी की कि दोषी की पृष्ठभूमि पर गौर करते हुए और वह किसी अन्य अपराध में शामिल नहीं है, जॉन को प्रोबेशन ऑफ ऑफेंडर्स एक्ट के तहत राहत दी जा सकती है.


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