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इस्लाम के खिलाफ युद्धः पाठ्यक्रम पर जांच

इस्लाम के खिलाफ युद्धः पाठ्यक्रम की जांच

वाशिंगटन. 11 मई 2012 बीबीसी

इस्लाम

 

अमरीका के सबसे वरिष्ठ सैनिक अधिकारी मार्टिन डेम्पसी ने एक अमरीकी सैनिक कॉलेज में इस्लाम के विरुद्ध 'खुले युद्ध' का पाठ पढ़ाए जाने की कड़ी आलोचना करते हुए मामले की पूरी जाँच के आदेश दे दिए हैं.

जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल मार्टिन डेम्पसी ने कहा कि ये कोर्स 'पूरी तरह आपत्तिजनक और हमारे मूल्यों के विरुद्ध' है. इस पाठ्यक्रम में सुझाया गया था कि अमरीका इस्लाम से जंग लड़ रहा है और वो मक्का जैसे पवित्र शहरों को परमाणु हमलों से नष्ट करने पर विचार कर सकता है और आम नागरिकों को भी खत्म कर सकता है. इस कोर्स पर पिछले महीने से रोक लगा दी गई है.

जनरल डेम्पसी ने इस स्वैच्छिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम को पूरी तरह से आपत्तिजनक और धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक जागरुकता के प्रति अमरीकी रुख के विपरीत बताते हुए बताया कि एक छात्र की आपत्ति के बाद अप्रैल से ये कोर्स रोक दिया गया है.

ये स्वैच्छिक कोर्स सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए था और इसे नॉरफौक, वर्जीनिया के ज्वाइंट फोर्से स्टाफ कॉलेज में पढाया जा रहा था. इसमें सुझाया गया कि उदार इस्लाम जैसी कोई बात नहीं है और सेना को इस्लाम को अपना दुश्मन मानना चाहिए.

इस कोर्स के बारे में तब पता चला जब एक अफसर ने इसकी शिकायत की. करीब एक साल से चल रहे इस कोर्स को पिछले महीने बंद कर दिया गया. कक्षा के प्रमुख अधिकारी लेफ़्टिनेंट कर्नल मैथ्यू डूली को पढ़ाई के काम से निलंबित कर दिया गया है मगर नॉरफौक के कॉलेज में उनकी नौकरी बरकरार है. इस खबर को सबसे पहले 'वायर्ड' वेबसाइट ने छापा था और पेंटागन ने कहा था कि पाठ्यक्रम की विषयवस्तु सही दर्शाई गई थी.

जनरल डेम्पसी ने विस्तृत जांच के आदेश दिए है और कहा है कि पता लगाया जाए कि अमरीका के सैन्य स्कूल धर्म के बारे में क्या पढ़ा रहे हैं. इस बात की भी जांच की जा रही है कि इस पाठ्यक्रम को कैसे मंजूरी मिल गई.

पेंटागन को उम्मीद है कि एक महीने तक जांच की रिपोर्ट आ जाएगी. लेफ्टिनेंट कर्नल डूली ने पिछले साल जुलाई में कक्षा में कहा था, "अब हम ये समझ गए हैं कि उदारवादी इस्लाम जैसी कोई चीज नहीं होती. इसलिए अब समय आ गया है कि अमरीका अपनी मंशा स्पष्ट कर दे. ये बर्बर विचारधारा अब सहन नहीं की जाएगी. इस्लाम को बदलना होगा नहीं तो हम अपने आप को ही नष्ट कर लेंगे." इस खबर के सामने आने के बाद से लेफ्टिनेंट कर्नल डूली ने कोई बयान नहीं दिया है.