पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

बीटी कॉटन के चक्रव्यूह से निकलना जरूरी

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

बीटी कॉटन के चक्रव्यूह से निकलना जरूरी

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

मानव मन और शहर का जल-थल

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >कला >बिहार Print | Share This  

गैंग्स ऑफ वासेपुर में मुसहरों का संगीत

गैंग्स ऑफ वासेपुर में मुसहरों का संगीत

मुजफ्फरपुर. 13 मई 2012

गैंग्स ऑफ वासेपुर


गैंग्स ऑफ वासेपुर के सहारे बिहार की अत्यंत पिछड़ी मुसहर जाति का गीत-संगीत इस बार फ्रांस के कान फेस्टिवल में भी सुनाई पड़ेगा. अनुराग कश्यप की इस फिल्म को कान फेस्टिवल के लिये नामांकित किया गया है, जिसमें मुसहर समुदाय का गीत शामिल है.

कोयला खदान में काम करने वाले लोगों के जीवन पर आधारित गैंग्स ऑफ वासेपुर में अनुराग बसु ने कटरा प्रखंड के सुंदरपुर टोले के मुसहरों के सामुहिक गीत-संगीत को सुंदर तरीके से परदे पर उकेरा है. इस गीत-संगीत की रिकार्डिंग गो, ओये लक्की लक्की ओये, लव सेक्स और धोखा, भेजा फ्राई जैसी फिल्मों की संगीतकार स्नेहा खानवलकर ने मुजफ्फरपुर में आ कर की थी. यह गीत-संगीत फिल्म में कई बार इस्तेमाल किया गया है.

हालांकि फिल्म में भोजपुरी के सुपर स्टार गायक और अभिनेता मनोज तिवारी का गाया हुआ गीत जीय हो बिहार के लाला भी अभी से लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है. लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि दलित समुदाय के मुसहरों का गीत भी लोगों को पसंद आएगा.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in