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बाल विवाह के चक्कर में फंसे मप्र के मंत्री

बाल विवाह के चक्कर में फंसे मप्र के मंत्री

भोपाल. 17 मई 2012

विवाह

 

मध्यप्रदेश में एक आदिवासी नाबालिग लड़की का एक शादीशुदा युवक से विवाह करवाना मध्य प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष प्रभात झा और राज्य के आदिम जाति कल्याण राज्य मंत्री हरिशंकर खटीक को महंगा पड़ गया. उनके साथ-साथ कुल पांच भाजपा नेताओं को अदालत का चक्कर लगाना पड़ सकता है. इस विवाह के खिलाफ राज्य के पूर्व मंत्री और कांग्रेसी नेता यादवेंद्र सिंह ने टीकमगढ़ के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी विपिन सिंह भदौरिया की अदालत में एक मामला दर्ज कराया है.

गौरतलब है कि टपरियन गांव में 12 अप्रैल 2008 को एक आदिवासी परिवार को कांगेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी ने उनके सुख-दुख में साथ निभाने का आश्वासन दिया था. लेकिन राहुल गांधी अपने वादे को भूल गये. राज्य की भाजपा सरकार को जब इसका पता चला तो मुख्यमंत्री के निर्देश पर उस आदिवासी परिवार की लड़की की शादी खास तौर पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा और प्रदेश के आदिम जाति कल्याण राज्य मंत्री हरिशंकर खटीक की उपस्थिति में कराई गई. अब उसी विवाह को लेकर कांग्रेस ने विरोध जताया है.

कांग्रेस नेता यादवेन्द्र सिंह ने अपने इस्तगासे में कहा है कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत 25 अप्रैल को टपरियन गांव में नाबालिग आदिवासी कन्या अंगूरी बाई का विवाह शादीशुदा रमेश से कराया गया था. यह शादी बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष प्रभात झा, राज्य मंत्री खटीक, जिला बीजेपी अध्यक्ष नंदकिशोर नापित, बीजेपी युवा मोर्च के जिलाध्यक्ष राकेश गिरी और पूर्व संसदीय सचिव बेबी राजा के संरक्षण में करावाई गई थी, लिहाजा उक्त व्यक्तियों के खिलाफ बाल विवाह अधिनियम के तहत मामला दर्ज कराया जाए.

यादवेन्द्र सिंह का आरोप है कि अंगूरी बाई का जन्म 11 मई 1996 को हुआ था और शादी के समय वह बालिग नहीं थी. जबकि जिस रमेश नामक व्यक्ति से उसका विवाह कराया गया, वह पहले से ही शादीशुदा है और उसकी पहली पत्नी मिथिलेश जिंदा है और उसका उसके साथ तलाक भी नहीं हुआ है.


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