पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >श्रीलंका Print | Share This  

सरथ फोनसेका होंगे रिहा

सरथ फोनसेका होंगे रिहा

कोलंबो. 20 मई 2012 बीबीसी

सरथ फोंनसेका


श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे ने जेल में बंद पूर्व सेना प्रमुख सरथ फोनसेका को रिहा करने के आदेश दिए हैं.

राष्ट्रपति के एक प्रवक्ता ने बीबीसी को बताया कि औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद फोंनसेका को सोमवार को रिहा किया जाएगा. दो वर्ष पहले यानी 2010 में राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के खिलाफ चुनाव लड़ने के बाद सरथ फोनसेका को गिरफ्तार किया गया था. उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे.

जनरल सरथ फोनसेका को वर्ष 2009 में तमिल विद्रोहियों के खिलाफ श्रीलंका सेना की जीत का श्रेय दिया जाता है. इस समय श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों पर जीत की तीसरी वर्षगांठ मनाई जा रही है और शनिवार को राजधानी कोलंबो में सेना की एक बड़ी परेड हुई है.

सरथ फोनसेका के सहयोगी और संसद सदस्य तिरन एलिस ने बीबीसी को बताया कि फोनसेका को सोमवार को रिहा किया जा सकता है. उनका कहना है कि सोमवार को ही उनको अस्पताल से भी छुट्टी मिल जाएगी. सांस लेने में दिक्कत की वजह से अस्पताल में भर्ती करना पड़ा था.

श्रीलंका के विदेश मंत्री इस समय वॉशिंगटन में अमरीकी विदेश मंत्री हिलेरी क्लिंटन से मिल रहे हैं. वे श्रीलंकाई सेना पर लगे युद्धापराध के आरोपों से बचाव की कोशिश करेंगे. कोलंबो में बीबीसी के संवाददाता चार्ल्स हेवीलैंड का कहना है कि हालांकि अमरीका सरथ फोनसेका को राजनीतिक बंदी कहता है लेकिन एक बार वे जेल से रिहा होंगे तो श्रीलंका पर लग रहे सारे युद्धापराध के सारे आरोपों के जवाब उन्हें ही देने होंगे और उन राजनीतिज्ञों का बचाव करना होगा जिनसे वे नाटकीय तरीक़े से दूर हो चुके हैं.

श्रीलंका में तमिल विद्रोहियों का संघर्ष 1980 में शुरु हुआ था जब उन्होंने बढ़ते सिंहली दबदबे के खिलाफ आवाज उठाई थी और अपने लिए अलग देश की मांग शुरु कर दी थी. हालांकि इस संघर्ष का बड़ा हिस्सा तमिल बहुल उत्तरी श्रीलंका में ही रहा लेकिन 1990 के दशक में तमिल विद्रोहियों के संगठन एलटीटीई ने राजधानी कोलंबो में भी कई बड़े हमले किए थे.

तमिल विद्रोहियों और सरकारी सेना के बीच हुए युद्ध में कोई 70 हजार लोगों की जानें गईं. अब मानवाधिकार संगठन आरोप लगा रहे हैं कि सेना ने तमिल विद्रोहियों के खिलाफ संघर्ष में अत्याचार किए और आम नागरिकों को भी नहीं बख़्शा. श्रीलंका सरकार इन आरोपों का खंडन करती है.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in