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यह लिखा अन्ना ने मनमोहन सिंह को

यह लिखा अन्ना ने मनमोहन सिंह को

नई दिल्ली. 26 मई 2012

अन्ना हजारे


समाजसेवी अन्ना हजारे ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को पत्र लिख कर उनके साथ-साथ उनके 14 मंत्रियों पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं. अन्ना हजारे ने 79 पन्नों में मंत्रियों के भ्रष्टाचार के दस्तावेज के साथ प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर कहा है कि अगर 24 जुलाई 2012 तक इस पर कार्रवाई नहीं हुई तो देश भर में इस मुद्दे पर आंदोलन किया जायेगा. ये रहा टीम अन्ना का पत्र-

26.05.2012

आदरणीय डॉ. मनमोहन सिंह जी,

भ्रष्टाचार के खिलापफ एक सख़्त लोकपाल कानून के लिए देश पिछले 44 साल से इंतजार कर रहा है। लेकिन आज तक यह कानून पारित नहीं किया गया। वह इसलिए क्योंकि यह कानून नेताओं के भ्रष्टाचार रोकने की मांग करता है। ऐसा लगता है कि नेता अपने ही खिलाफ कानून पारित नहीं करना चाहते। पिछले साल एक सशक्त लोकपाल बिल पारित करने के लिए देश भर में एक बड़ा आंदोलन हुआ। 27 अगस्त को संसद ने एक प्रस्ताव पारित करके एक सशक्त लोकपाल जल्दी पारित करने का आश्वासन दिया। आपने भी अन्ना हज़ारे जी को पत्र लिखकर ऐसा आश्वासन दिया। पूरे देश को उम्मीद थी कि संसद के शीतकालीन सत्र में तो यह कानून पारित हो ही जाएगा। लेकिन शीतकालीन सत्र में यह कानून पारित नहीं हुआ। 27, 28 और 29 दिसंबर को शीतकालीन सत्र में जब इस बिल पर चर्चा हुई तो सारे देश ने देखा कि किस तरह से संसद में नाटक रचा गया। एक तो संसद में कमज़ोर बिल पेश किया और उसके बाद बिल की प्रति संसद में फाड़ दी गई। बिल को पारित होने से रोकने के लिए हर संभव प्रयास किया गया और अंततः बिल पारित नहीं हुआ। पूरे देश को यह उम्मीद थी कि बजट सत्र में तो यह बिल पारित हो ही जाएगा। पूरा बजट सत्र बीत गया और अंत में लोकपाल बिल एक और कमेटी के हवाले कर दिया गया।

ऐसे में सवाल उठता है कि देशवासियों को भ्रष्टाचार से मुक्ति कैसे मिलेगी? सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग इत्यादि देश की सभी जांच एजेंसियां आपके और आपके मंत्रिमंडल के सीधे नियंत्रण में है। जब ये मंत्री भ्रष्टाचार करते हैं तो अधिकतर मामलों में जांच भी नहीं होती। एफ.आई.आर. तक दर्ज नहीं होती। कुछ मामलों में जांच होती भी है तो ये एजेंसियां इन भ्रष्ट मंत्रियों को सज़ा दिलाने की बजाए इनको बचाने में लग जाती हैं। सीबीआई को बने हुए आज 49 साल हो गये। सीबीआई को इसलिए बनाया गया था ताकि नेताओं और बड़े अफसरों के भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई हो सके। लेकिन सीबीआई उन्हीं लोगों के नियंत्रण में है जिनके खिलाफ उसे जांच करनी है। यही वजह है कि आज अपने 49 साल के इतिहास में सीबीआई केवल 3 नेताओं को सज़ा दिलवा पाई है।

ऐसा लगता है कि सभी पार्टियों में सांठ-गांठ है। चाहे किसी पार्टी की सरकार आ जाए, वो दूसरी पार्टी के नेताओं को सज़ा नहीं दिलवाती। जैसे- एनडीए की सरकार ने भी बोफोर्स मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।

प्रधानमंत्री जी, अब पूरे देश के सामने यह साफ ज़ाहिर है कि आपकी सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख़्त कानून पारित करना ही नहीं चाहती। ऐसा क्यों है? थोड़ा गहराई से सोचने पर स्पष्ट होता है कि आपके मंत्रिमंडल के 34 में से 15 मंत्री ऐसे हैं जिन पर समय-समय पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगते रहे हैं। इनमें से कुछ आरोपों की जानकारी संलग्न हैं। ये आरोप मामूली नहीं हैं और ये आरोप हम नहीं लगा रहें। समय-समय पर ये आरोप इस देश की सर्वोच्च संस्थाओं ने लगाएं हैं। जैसे - सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, सीएजी इत्यादि। हमने इन सभी मंत्रियों को चिट्ठी लिखकर इन आरोपों के बारे में अपनी बात बताने के लिए निवेदन किया था। हमें केवल सलमान खुर्शीद जी से जवाब प्राप्त हुआ है। उन्होंने भी अपने उपर लगे आरोपों का जिक्र नहीं किया। हम यह कैसे उम्मीद करें की ऐसा मंत्रिमंडल भ्रष्टाचार के खिलाफ ऐसा सख्त कानून पारित करेगा, जिसके पारित होते ही उसके लगभग आधे सदस्य जेल जा सकते हैं?

इससे साफ ज़ाहिर है कि जब तक मंत्रिमंडल का शुद्धिकरण नहीं होगा तब तक लोकपाल का सशक्त ड्राफ्ट संसद में प्रस्तुत नहीं किया जाएगा। इसलिए हमारी निम्नलिखित मांग है-

एक स्पेशल जांच दल बनाया जाए जो कि सरकार से बिल्कुल स्वतंत्र हो। यह जांच दल 6 महीने के अंदर इन सभी 15 मंत्रियों के खिलाफ अभी तक लगे सभी आरोपों की जांच पूरी करें। जांच दल को सभी सुविधाएं उपलब्ध हों। यह अपनी जरूरत के अनुसार अपना स्टाफ और जांच अधिकारी नियुक्त कर सके। इन मंत्रियों ने भ्रष्टाचार का पैसा कहां जमा करके रखा है- इस बात की तहकीकात करना भी इस जांच दल की जिम्मेदारी हो।

क्या इन मंत्रियों के स्विस बैंकों अथवा अन्य टैक्स हेवन में बैंक खाते है- इसकी जांच करने की जिम्मेदारी भी इस जांच दल को हो। इस जांच दल की अध्यक्षता निम्नलिखित में से किन्हीं तीन रिटायर्ड जजों द्वारा की जायेः
1. जस्टिस सुदर्शन रेड्डी, रिटायर्ड
2. जस्टिस गांगुली, रिटायर्ड
3. जस्टिस ए. पी. शाह, रिटायर्ड
4. जस्टिस कुलदीप सिंह, रिटायर्ड
5. जस्टिस जे. एस. वर्मा, रिटायर्ड
6. जस्टिस एम. एन. वैंकेट चेलैया, रिटायर्ड

अफवाहें हैं कि मुलायम सिंह जी के साथ आपकी सरकार का समझौता हो गया है कि राष्ट्रपति के चुनाव और संसद में वो आपकी मदद करेंगे और बदले में आप उनके खिलाफ चल रहे सीबीआई के मामलों को ठंडे बस्ते में डलवा देंगे। क्या यह सच है? क्या यही लोकतंत्र है? क्या इसी तरह की सौदेबाजियों से हमारी संसद चलती है? इसलिए हमारी मांग है किः

जिन पार्टी अध्यक्षों ;जैसे - सुश्री मायावती जी, श्री मुलायम सिंह जी, श्री लालू प्रसाद यादव, सुश्री जयललिता इत्यादि के खिलाफ सीबीआई के मामले चल रहे हैं, वो सीबीआई से निकालकर उनपर बनाए जा रहे स्वतंत्र जांच दल को सौंप दिए जाएं।

टीम अन्ना के सदस्यों पर समय-समय पर आरोप लगाए गए। इन सभी आरोपों की जांच का काम भी उपर्युक्त स्पेशल जांच दल को सौंपा जाए। अगर किसी भी सदस्य के खिलाफ कोई आरोप साबित होता है तो कानून में लिखी सज़ा से दोगुनी सज़ा दी जाए।

लोकपाल बिल पर संसद में अभी तक हुई चर्चा से यह साफ ज़ाहिर है कि लगभग कोई पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ एक सशक्त लोकपाल बिल नहीं चाहती। ऐसा क्यों है? क्योंकि लोकसभा में 162 सांसद और राज्यसभा में 39 ऐसे सांसद हैं जिन पर गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं। हमारे देश की न्यायिक प्रक्रिया इतनी धीमी है कि यह मामले चलते ही रहेंगे। इसके अलावा कई ऐसे सांसद हैं, जिनपर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे हैं। जब तक संसद का शुद्धिकरण नहीं होगा तब तक हम कैसे यकीन करें कि यह संसद भ्रष्टाचार के खिलाफ सख़्त कानून पारित करेगी? इसीलिए हमारी मांग है कि-

देशभर में उचित संख्या में स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएं और दागी सांसदों के सभी मामले इन कोर्ट्स में छः महीने में निपटाए जाए।

गांधीजी कहते थे- पाप से घृणा करो, पापी से नहीं। हमारी किसी व्यक्ति विशेष से कोई दुर्भावना नहीं है। हम एक भ्रष्टाचार मुक्त भारत चाहते हैं और इसके लिए उपर सुझाए गए कदम उठाना अत्यंत जरूरी है। यदि यह कदम तुरंत नहीं उठाए जाते तो 25 जुलाई, 2012 से जनता को मजबूरन आंदोलन की राह पर आगे बढ़ना होगा।

संलग्नकः
15 मंत्रियों पर लगे आरोपों से संबंधित दस्तावेज़

अन्ना हजारे, अरविंद केजरीवाल, शांति भूषण, प्रशांत भूषण, किरण बेदी, मनीष सिसोदिया


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