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बेटी को बचाने बयान से पलटे करुणानिधि?

बेटी को बचाने बयान से पलटे करुणानिधि?

नई दिल्ली. 30 मई 2012

एम करुणानिधि


डीएमके प्रमुख एम करुणानिधि केंद्र से समर्थन वापस लेने की धमकी से मुकर गये हैं. बुधवार की सुबह उन्होंने कहा था कि सरकार की अगर जनविरोधी नीतियां इसी तरह जारी रहीं तो उनकी पार्टी यूपीए से समर्थन ले लेगी. उन्होंने कहा था कि सरकार को तुरंत पेट्रोल की बढ़ी हुयी कीमतें वापस लेनी चाहिये. वे बुधवार को पेट्रोल विरोधी आंदोलन के दौरान अपने समर्थकों को संबोधित कर रहे थे. इसी के लिये बुधवार को उनकी पार्टी ने तमिलनाडु बंद का भी आह्वान किया था. अब करुणानिधि अपनी बात से पलट गये हैं.

इधर राजनीतिक हलकों में इस बात की अफवाह फैल गई कि केंद्र सरकार की ओर से उन तक संदेश पहुंचाया गया कि अगर वे इस बयान को वापस नहीं लेंगे तो उनकी बेटी कणीमोझी दूरसंचार घोटाले से बाहर नहीं निकल पाएगी और उन्हें एक बार फिर जेल में जाना पड़ेगा. कहा जा रहा है कि बेटी को बचाने के लिये करुणानिधि अपनी बात से पलटे हैं.

गौरतलब है कि पेट्रोल की बढ़ी हुई कीमतों को लेकर तृणमूल नेता ममता बनर्जी पहले ही सरकार को चेतावनी दे चुकी हैं और कोलकाता में जनता मार्च कर चुकी हैं. इसी तरह सरकार में शामिल कुछ और दलों ने भी सरकार का विरोध किया है. केंद्रीय रक्षा मंत्री ए.के. एंटोनी तक पेट्रोल की बढ़ी हुई कीमत का विरोध कर चुके हैं. ऐसे में करुणानिधि का सरकार विरोध और दो टूक लहजे में सरकार से समर्थन वापस लेने की चेतावनी केंद्र की यूपीए सरकार को अकबकाने के लिये काफी था.

बुधवार को एक प्रदर्शन में एम करुणानिधि ने कहा कि केंद्र सरकार तुरंत पेट्रोल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी वापस ले. डीएमके नेता ने कहा था कि अगर सरकार उनकी मांग पर विचार नहीं करेगी तो वे सरकार से समर्थन वापस ले लेंगे और सरकार को चलने नहीं देंगे.उन्होंने कहा था कि हमने सरकार के साथ सामंजस्य बैठाने की काफी कोशिश की लेकिन डीएमके अपने सिद्धांतों के साथ समझौता नहीं करेगी. सुबह की रैली में यह सब कुछ बोलने के बाद जब केंद्र सरकार हरकत में आई तो दोपहर होते-होते करुणानिधि अपने बयान से पलट गये. उन्होंने कहा कि उन्होंने सरकार से समर्थन वापस लेने के बारे में नहीं कहा था.

डीएमके केंद्र सरकार में शामिल दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है, जिसके 18 सदस्य सांसद हैं. यूपीए के सबसे बड़े घटक दल के तौर पर तृणमूल का नंबर है. यूपीए सरकार में शामिल कांग्रेस के पास 206, तृणमूल कांग्रेस के 19, द्रमुक के 18, राकांपा के 9, रालोद के 5, नेकां के 3, झामुमो के 2, आइयूएमएल के 2, एआइएमएआइएं के 1, केरल कांग्रेस के 1 और वीसीके के 1 सदस्य हैं. ऐसे में करुणानिधि की टिप्पणी से सरकार मुश्किल में आ सकती है.


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