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सेना और सरकार के बीच झगड़ा नहीं-वीके सिंह

सेना और सरकार के बीच झगड़ा नहीं-वीके सिंह

पुणे. 30 मई 2012

वीके सिंह


सेना प्रमुख जनरल वीके सिंह ने कहा है कि उनके संबंध रक्षा मंत्रालय के साथ खराब नहीं हैं. सरकार और सेना के बीच किसी भी तरह की विवाद की स्थिति नहीं है. उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद उनकी पहली प्राथमिकता पीएचडी करनी होगी. जनरल वीके सिंह अपनी सेवानिवृत्ति से एक दिन पहले पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे.

पत्रकारों से बातचीत करते हुये वीके सिंह ने कहा कि रक्षा मंत्रालय और सेना के बीच किसी तरह की गलतफहमी नहीं है. हम एक हैं. सेना सरकार का हिस्सा है. सेना कुछ भी कहती है तो उसे सुना जाता है. वहां एक प्रक्रिया है. कोई यह कहे कि सेना की सुनी नहीं जा रही है और इसकी वजह से फैसलों में देरी हो रही है, ऐसा नहीं है.

रक्षा मंत्री ए के एंटनी को लेकर उन्होंने कहा कि मेरा मंत्रालय के साथ संबंध खराब नहीं हैं. कुछ लोग अगर ऐसा कहते हैं तो आप उनसे पूछिए. अगर कोई चीज आगे नहीं बढ़ी है तो इसके कारण रहे होंगे. इसकी वजहें जहाँ हैं, सवाल वही किया जाना चाहिए. रक्षा मंत्री सेना का पूरा समर्थन करने वाले खुले दिमाग के व्यक्ति हैं.

वीके सिंह ने कहा कि हमारी तीनों सेनाएं जिस भी स्थिति में हैं, वे किसी भी चुनौती का सामना करने को तैयार हैं. तीनों सेनाएं अलग-अलग ढंग से अपना आधुनिकीकरण कर रही हैं. जैसे-जैसे आधुनिकीकरण होता जाएगा, उनकी क्षमता बढ़ती जाएगी. उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा दो सिद्धांतों पर आधारित है. पहला, भारत किसी दूसरे देश के क्षेत्र पर बुरी निगाह नहीं रखता और दूसरा वह किसी पर अपने सिद्धांत नहीं थोपता. इसलिए जब देश की सीमाओं की सुरक्षा की बात होती हैं तो सेना बेहद ही अहम भूमिका निभाती है.

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वीके सिंह ने कहा किदेश के हर नागरिक का फर्ज है कि वह इसके खिलाफ आवाज उठाए. यह सभी का अधिकार है. गांधी जी ने कहा था कि ज्यादती करना और सहना दोनों ही पाप है.


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