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बाकी जिंदगी जेल में काटेंगे मनमोहन

बाकी जिंदगी जेल में काटेंगे मनमोहन

नई दिल्ली. 31 मई 2012

अन्ना हजारे


प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के भावुक बयान के बाद टीम अन्ना ने मनमोहन सिंह पर पलटवार करते हुये कहा है कि मनमोहन सिंह घोटाले का आरोप साबित होने के बाद संन्यास लेने की बात करने के बजाये जेल जाने की बात करें. टीम अन्ना के मनीष सिसोदिया ने कहा कि पीएम कोयला घोटाले में जांच से क्यों बच रहे हैं? पीएम कहते हैं कि आरोप सही हुए तो वह संन्यास ले लेंगे. वह यह क्यों नहीं कहते कि आरोप सही पाए गए तो वह बाकी जिंदगी जेल में काटेंगे? इसका मतलब यह है कि पीएम यह स्वीकार कर रहे हैं कि करप्शन के आरोप साबित होने के बाद भी नेता ऐश के साथ जिंदगी बिता सकते हैं.

दूसरी ओर अरविंद केजरीवाल ने कहा कि पीएम पर आरोप उन्होंने नहीं बल्कि सीएजी की रिपोर्ट में लगाए गए हैं. सीएजी के मुताबिक कोल ब्लॉक की नीलामी न करने से सरकार को 1 लाख 80 हजार करोड़ रुपये की चपत लगी. सरकार ने रॉयल्टी की कीमत तक नहीं बढ़ाई.

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमें लगता है कि पीएम ईमानदार हैं. उन्हें इसका सीधा फायदा नहीं हुआ होगा, लेकिन इसका फायदा किसी को तो हुआ ही है. उन्होंने कहा कि पीएम को इस मामले की स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवानी चाहिए. उन्होंने कहा प्रधानमंत्री जी हम आपसे पूछना चाहते हैं कि देश के करोड़ों भूखे बच्चों के पिता होने के नाते आपको नींद कैसे आती है? लोग भ्रष्टाचार से पीड़ित हैं. केंद्र के कई मंत्री घोटाला कर और अमीर बनते जा रहे हैं.

टीम अन्ना ने मनमोहन सिंह से 4 सवाल भी पूछे. टीम अन्ना ने पूछा कि अगर कोई मंत्री करप्शन करे तो वह कौन सी एजेंसी है जो सरकार से स्वतंत्र है और जहां उस करप्शन की रिपोर्ट दर्ज कराई जा सके?, जिस मंत्री के खिलाफ करप्शन के आरोप लगे हैं यदि वह कहे कि उसने करप्शन नहीं किया या पीएम कहें कि उन्होंने करप्शन नहीं किया, तो क्या बिना निष्पक्ष जांच के देश इस बात को मान ले?, क्या यह सच है कि तत्कालीन कोयला सचिव ने कई बार आपको कोयला खदानों की नीलामी करने की सलाह दी थी? क्या यह सच है कि पीएमओ ने वह सलाह खारिज कर दी? क्या आपने खुद उन फाइलों पर दस्तखत किए थे?, सीएजी का आकलन है कि कोयला खदानों की नीलामी न करने से देश को 1.8 लाख करोड़ का नुकसान हुआ. अगर इतना करप्शन न होता तो पेट्रोल पर टैक्स कम किया जा सकता था. क्या आप मानते हैं कि तब पेट्रोल की कीमतें बढ़ाने की जरूरत न पड़ती और आम आदमी को महंगाई की मार से बचाया जा सकता था?


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