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15 साल की लड़की की शादी गैरकानूनी नहीं

15 साल की लड़की की शादी गैरकानूनी नहीं

नई दिल्ली. 6 जून 2012

शादी


अब 15 साल की उम्र में किसी मुस्लिम लड़की की शादी गैर कानूनी नहीं मानी जाएगी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपने एक ताजा फैसले में ऐसी शादी को जायज ठहराया है. जस्टिस एस. पी. गर्ग और जस्टिस एस. रवींद्र भट्ट की खंडपीठ ने अपने एक ताजा फैसले में कहा है कि इस्लामिक कानून के मुताबिक कोई भी मुस्लिम लड़की बिना अपने माता-पिता की इजाजत के शादी कर सकती है बशर्ते उसने तरुणाई यानी प्यूबर्टी हासिल कर ली हो. अगर उसकी उम्र 18 साल से कम भी है तो उसके पास अपने पति के साथ रहने का हक है.

अदालत ने यह फैसला एक 16 साल की मुस्लिम लड़की की मां की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को खारिज करते हुये सुनाया. लड़की की मां का आरोप था कि उसकी लड़की का पिछले साल अप्रैल में अपहरण कर लिया गया था, जबकि लड़की का कहना था कि उसे उसके पति के साथ रहने दिया जाये. उसका कहना था कि उसने अपनी मर्जी से घर छोड़ा है और अपने पति के साथ रह रही है.

दिल्ली उच्च न्यायालय ने इस मामले में फैसला सुनाते हुये उच्चतम न्यायालय के कई मामलों का हवाला दिया और कहा कि तरुणाई की उम्र अमूमन 15 साल में शादी करने पर शादी अवैध नहीं ठहराई जा सकती है. हालांकि, ऐसी लड़की के पास यह विकल्प है कि बालिग होने यानी 18 साल की होने पर वह अपनी शादी को खारिज कर सकती है.

अदालत के इस फैसले को लेकर व्यापक बहस की उम्मीद जताई जा रही है. भारत में अभी तक शादी की उम्र लड़की के लिये 18 और लड़के के लिये 21 साल है. हालांकि इसकी व्याख्या में भी कई पेंच हैं.


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