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संगमा पर बंट गया एनडीए

संगमा पर बंट गया एनडीए

नई दिल्ली. 21 जून 2012 बीबीसी

पीए संगमा


राष्ट्रपति चुनाव को लेकर एक ओर जहाँ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में दरार खुलकर साफ नज़र आने लगी वहीं वाममोर्चा में भी एक राय कायम नहीं हो सकी. नतीजा ये हुआ कि गुरुवार को एनडीए का नेतृत्व करने वाली भाजपा ने पीए संगमा को अधिकृत तौर पर समर्थन देने का ऐलान किया तो एनडीए के एक अहम घटक दल जनता दल (यू) ने यूपीए के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी को समर्थन देने की घोषणा कर दी. एनडीए के एक और अहम घटक दल शिवसेना ने भी पहले से ही प्रणब मुखर्जी को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी.

दूसरी ओर वाममोर्चे की एक घंटे चली बैठक के बाद वामपंथी दल किसी एक नतीजे पर नहीं पहुँच सके. आख़िर में तय हुआ कि वाममोर्चे के दो दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) और फॉर्वर्ड ब्लॉक दोनों प्रणब मुखर्जी का समर्थन करेंगे वहीं भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) और आरएसपी ने मतदान में हिस्सा न लेने का फ़ैसला किया.

इससे साफ़ हो गया है कि राष्ट्रपति पद के लिए यूपीए के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी के मुक़ाबले के लिए मैदान में पीए संगमा होंगे, जिन्हें अब भाजपा सहित कई दलों ने समर्थन का आश्वासन दिया है.

राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव 19 जुलाई को होने हैं. सीपीएम के नेता प्रकाश करात और सीताराम येचुरी, सीपीआई के नेता एबी बर्धन, आरएसपी के नेता टीजे चंद्रचूड़न और फॉर्वर्ड ब्लॉक के देबब्रत बिश्वास के बीच एक घंटे तक इस विषय पर चर्चा हुई.

बैठक के बाद एबी बर्धन ने बिना विवरण दिए हुए कहा, "दो पार्टियों ने प्रणब मुखर्जी को समर्थन देने का फ़ैसला किया है जबकि दो मतदान में हिस्सा नहीं लेंगीं." इसके बाद सीपीएम के महासचिव प्रकाश करात ने कहा, "वर्तमान परिस्थितियों में प्रणब मखर्जी राष्ट्रपति पद के लिए ऐसे उम्मीदवार हैं जिनकी स्वीकार्यता सर्वाधिक है."

राजनीतिक अटकलों और खींचतान के बीच भारतीय जनता पार्टी ने स्वीकार किया है कि राष्ट्रपति चुनाव को लेकर वह एनडीए की दो पार्टियों शिवसेना और जनता दल (यू) को नहीं मना पाया है. इसके बाद उसने पीए संगमा को समर्थन देने की घोषणा की है.

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज और राज्यसभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने संयुक्त रुप से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा की है.

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता ने लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष पीए संगमा का नाम राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रुप में सामने रखा था.

पत्रकारों को जानकारी देते हुए सुषमा स्वराज ने कहा, ''हमारे पास दो विकल्प थे एक ऐपीजे अब्दुल कलाम और दूसरा पीए संगमा. लेकिन कलाम ने जब ये घोषणा की कि वे चुनाव की दौड़ में शामिल नहीं है तो भाजपा ने फैसला लिया कि वह अधिकृत रूप से पीए संगमा की उम्मीदवारी का समर्थन करेगी.''

सुषमा ने बताया कि आडवाणी ने इस बारे में पंजाब के सहयोगी दल अकाली दल से चर्चा की है और अकाली दल भाजपा के रुख़ के साथ रहेगा.

एनडीए के घटक दल शिवसेना ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वह यूपीए के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी का समर्थन करेगी और अब भाजपा की घोषणा के बाद एनडीए के दूसरे घटक दल जेडीयू ने भी प्रणब मुखर्जी को समर्थन करने की घोषणा की है. जनतादल(यू) के अध्यक्ष और एनडीए के संयोजक शरद यादव का कहना था कि उनकी कोशिश एक राय बनाने की थी और उनकी पार्टी नहीं चाहती थी कि इस पद के लिए चुनाव हो.

यूपीए ने अपना उम्मीदवार घोषित करने के बाद बात की लेकिन बेहतर ये होता कि वो विपक्षी दलों से आमराय करने के बाद ऐसा करते. यूपीए को उम्मीदवार की घोषणा करने से पहले कम से कम मुख्य विपक्षी पार्टी भाजपा से बात करनी चाहिए थी.

उन्होंने एनडीए में दरार की अटकलों को खारिज करने की कोशिश करते हुए कहा, ''अलग-अलग पार्टियों की राय होती है, लेकिन हमने यूपीए के पार्टी के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी को समर्थन देना का फैसला लिया है.''

उनका कहना था कि प्रणब मुखर्जी को समर्थन देने का मतलब ये नहीं है कि हम यूपीए का समर्थन करते हैं. इससे पहले शिवसेना कह चुकी है कि वह यूपीए के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी का समर्थन करेगी. पीए संगमा ने भाजपा के समर्थन के लिए उनका आभार व्यक्त किया है और आशा व्यक्त की है कि ममता बनर्जी का समर्थन भी उन्हें मिल जाएगा.

संगमा ने पत्रकारों से कहा कि वे किसी एक दल के उम्मीदवार नहीं हैं. उन्होंने कहा, "दो ताकतवर मुख्यमंत्रियों ने मेरा नाम राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के रुप में प्रस्तावित किया और मैं इसके लिए उनका आभारी हूँ."

उन्होंने कहा कि एनडीए के घटक दलों अकाली दल, जेएमएम और छोटे दलों ने उनसे संपर्क करके समर्थन का वादा किया है. पीए संगमा ने कहा कि वे जल्दी ही देश के दौरे पर जाएँगे और एनडीए और यूपीए दोनों ही गठबंधनों के दलों से समर्थन मांगेंगे.


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