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बापू के सामान, विजय माल्या के नाम

बापू के सामान, विजय माल्या के नाम

नई दिल्ली. 07 मार्च 2009

 

भारतीय उद्योगपति विजय माल्या ने अमेरिका में हुई नीलामी में 18 लाख यूएस डॉलर यानी करीब नौ करोड़ रुपये चुकाकर महात्मा गांधी की बहुमूल्य वस्तुएं अपने नाम कर लीं.

ये धरोहर हैं, महात्मा गांधी का एक चश्मा, जेब घड़ी, एक जोड़ी चमड़े की चप्पलें, एक कटोरी और पीतल की वह थाली, जिसमें महात्मा गांधी ने 1948 में अपनी हत्या से पहले अंतिम बार भोजन किया था.

महात्मा गांधी के पोते तुषार गांधी ने कहा कि इन वस्‍तुओं के भारत आने के बाद मैं खुश हूं लेकिन सरकार ने जो किया वो निराशाजनक रहा. ज्ञात रहे कि भारत सरकार ने बापू की इन निशानियों को भारत लाने के लिए कई दावे किये थे.

भारत के विदेश राज्य मंत्री आनंद शर्मा ने अमरीका में अपने प्रतिनिधियों से कहा था कि वह महात्मा गांधी की यादगार निजी वस्तुओं को देश के लिए हासिल करने की हर संभव कोशिश करें, फिर चाहे इसके लिए उन्हें नीलामी में बोली ही क्यों न लगानी पड़े.

इस नीलामी से लंबा ड्रामा चला. भारत सरकार ने बापू की वस्तुओं को नीलाम कर रहे जेम्स ओटिस से गुजारिश की थी कि नीलामी रोक दी जाए. लेकिन ओटिस ने शर्त रखी कि वे गांधीजी की ये चीज़ें भारत सरकार को देने को तैयार हैं, बशर्ते सरकार ग़रीबों की ज़्यादा मदद करने को तैयार हो. ओटिस ने कहा कि भारत सरकार ग़रीबों पर ख़र्च की जाने वाली राशि को कुल राष्ट्रीय उत्पाद के एक प्रतिशत से बढ़ा कर पांच प्रतिशत कर दे. इसके बाद भी बात नहीं बनी और अंततः नीलामी में विजय माल्या ने आगे बढ़ कर महात्मा गांधी की ये वस्तुएं अपने नाम कर लीं.