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31 साल बाद वतन लौटे सुरजीत सिंह

31 साल बाद वतन लौटे सुरजीत सिंह

वाघा सीमा. 28 जून 2012

सुरजीत सिंह


1982 में गलती से सीमा पार कर पाकिस्तान में दाखिल होने वाले सुरजीत सिंह ने गुरुवार को भारत पहुंचने के बाद कहा कि वे अब जिंदगी में कभी भी पाकिस्तान नहीं जाएंगे. लाहौर की कोट लखपत जेल से भारत की वाघा तक की 40 किलोमीटर की दूरी तय करने में सुरजीत सिंह को 31 साल लग गये और इस बात की गवाही उनकी आंखों से बहते हुये आंसू दे रहे थे. इतने सालों तक पाकिस्तान की जेल में जासूसी के आरोप में सजा काटने वाले सुरजीत सिंह का कहना था कि वे अपने पुराने दिनों को याद नहीं करना चाहते. उन्होंने तो अपनी रिहाई की उम्मीद ही छोड़ दी थी.

गौरतलब है कि सुरजीत सिंह पर जनरल जिया-उल-हक के शासनकाल के दौरान जासूसी करने का आरोप लगाया गया. उन्हें 1989 में फांसी की सजा सुनाई गई थी. तत्कालीन प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की सिफारिश पर सुरजीत की मौत की सजा उम्रकैद में बदल दी गई थी.

सुरजीत सिंह को गुरुवार की सुबह लाहौर की कोट लखपत जेल से रिहा किया गया. जहां वे पाकिस्तानी अधिकारियों के साथ वाघा बार्डर तक पहुंचे. यहां पाकिस्तानी अधिकारियों ने उन्हें भारतीय सुरक्षाबल और दूसरे अधिकारियों के हवाले किया.

हालांकि आश्चर्यजनक तरीके से तमाम अंतरराष्ट्रीय कानूनों को धत्ता बताते हुये सुरजीत सिंह को जेल से रिहा करने के बाद भी पाकिस्तानी अधिकारियों ने हथकड़ीनुमा जंजीरों से उनके हाथ बांध रखा था. कुछ मानवाधिकार संगठनों ने पाकिस्तान के इस अमानवीय रव्वैये की निंदा की है.

भारत पहुंचने पर सुरजीत ने कहा कि वह बेहद खुश हैं. सुरजीत ने कहा कि उन पर लगाए गए आरोप निराधार थे. उन्होंने बताया कि जेल में उन्हें किसी तरह की परेशानी नहीं हुई. साथ ही उन्होंने कहा कि दोनों देशों की जेलों में बंद एक-दूसरे के कैदियों को रिहा किया जाना चाहिए.


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