पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >मध्यप्रदेश Print | Share This  

जेपी सीमेंट के एमडी सन्नी गौर के खिलाफ वारंट

जेपी सीमेंट के एमडी सन्नी गौर के खिलाफ वारंट

रीवा. 6 जुलाई 2012 आवेश तिवारी

सन्नी गौर


मध्य प्रदेश से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक अपना साम्राज्य स्थापित करने की होड़ में जंगल ,जमीन और जन के खिलाफ बरजोरी जेपी सीमेंट को महंगी पड़ी है. जिला एवं सत्र न्यायालय रीवा ने जेपी सीमेंट के एमडी सन्नी गौर समेत कम्पनी के अन्य अधिकारियों को हत्या के एक मामले में आरोपी बनाने के साथ ही गैर जमानती वारंट जारी कर दिया है. गौरतलब है कि 22 सितम्बर 2007 को मध्य प्रदेश के रीवा में जेपी के सीमेंट प्लांट के गेट पर विस्थापितों के खिलाफ जेपी के लोगों ने जबरदस्त फायरिंग की थी, जिसमें युवा किसान राघवेन्द्र सिंह की मौत हो गयी थी, वहीँ तीन दर्जन से ज्यादा लोग घायल हो गए थे.

इस घटना के बाद पूरे शहर में अराजकता फ़ैल गयी थी. युवा किसान की मौत से आग-बबूला प्रदर्शनकारियों ने कई वाहनों में आग लगा दी थी. उसी समय पुलिस ने आन्दोलनकारियों पर लाठी चार्ज भी किया था. पथराव और लाठी चार्ज के चलते कई आन्दोलनकारी घायल भी हुए थे.

इस घटना के बाद दोनों ही पक्षों की ओर से पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया गया था, लेकिन पुलिस ने फाइनल चार्जशीट से सन्नी गौर और अन्य अधिकारियों का नाम बाहर निकालकर सिर्फ इस मामले में रघुनंदन सिंह और संजय कुमार सिंह नाम के दो बॉडी गार्डों के ही नाम से चालान पेश किया था. जिसको लेकर पीड़ित पक्ष की ओर से इंद्रजीत पटेल नामक व्यक्ति के द्वारा एक जनहित याचिका उच्च न्यायालय में दायर की थी.

उच्च न्यायालय ने आदेश पारित किया कि इस प्रकरण को जिला एवं सत्र न्यायालय रीवा में लगाया जाये. मामले की सुनवाई के पश्चात् जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सभी के विरुद्ध गैर जमानती वारंट जारी करने का आदेश पारित किया है, इनमें सन्नी गौर के अलावा जेपी सीमेंट प्लांट से सम्बंधित, रजनीश गौड़, केपी शर्मा, सुरक्षा अधिकारी रमेश गुप्ता, अजय सिंह राणा, शिवशंकर चौबे और डीपी रावत के नाम भी शामिल हैं.

इस प्रकरण में पुलिस की कार्यप्रणाली शुरू से ही संदेह के दायरे में रही है. पहले तो पुलिस द्वारा इस मामले में सन्नी गौर और अन्य अधिकारियों के खिलाफ एफ आई आर दर्ज करने में नुक्ताचीनी की जाती रही ,वहीँ अपने शक्तिबल से गवाहों को धमकाने और मुंह बंद रखने की धमकी दी जाने लगी.

आश्चर्यजनक ये रहा कि इस पूरे मामले में मध्य प्रदेश पुलिस ने सन्नी गोंड और जेपी के अन्य अधिकारियों के पक्ष में फाइनल रिपोर्ट लगाने की संस्तुति कर दी थी.जबकि उक्त घटना में घायल लगभग 3 दर्जन विस्थापित बार-बार कहते रहे कि घटना के वक्त सन्नी गौर खुद सुरक्षाकर्मियों से बन्दुक लेकर मजदूरों पर फायरिंग करने लगे थे.

इस मामले में सन्नी गौर की ओर से इन्द्रजीत सिंह, जय सिंह सहित 21 लोगों के विरुद्ध धारा 307, 436 के तहत रिपोर्ट की गई थी. पुलिस ने इन सभी आरोपियों के विरुद्ध चालान पेश किया था मगर आन्दोलनकारियों द्वारा सन्नी गौर सहित अन्य लोगों के विरुद्ध दर्ज कराई गई रिपोर्ट पर पुलिस ने मात्र दो बॉडी गार्डों को ही आरोपी बनाया था. आश्चर्यजनक है कि इस मामले में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा एक न्यायिक जांच आयोग बनाया गया था ,लेकिन आयोग की जांच का नतीजा भी सिफर रहा.

इस पूरे मामले पर विस्थापितों के नेता और उस गोली कांड में घायल विकास सिंह बताते हैं कि गोली कांड में घायलों की ओर से घटना वाले दिन ही रीवा के चोरहटा थाने में लिखाई गई थी, रिपोर्ट में सन्नी गौर सहित जेपी प्रबंधन के अनेक अधिकारियों को इस गोली चलाने के लिए नामजद किया गया था, लेकिन रिपोर्ट दर्ज होने के बावजूद इन अभियुक्तों पर कार्रवाई न करके पुलिस ने घायलों पर ही दर्जन भर मुकदमे लाद दिए और दबाव बनाने के लिए मिथिलेश सिंह, अजयपाल, अंजनी सिंह एडवोकेट व पारसनाथ जैसे इस आन्दोलन के कार्यकर्ताओं को जिलाबदर तक किया गया.

पहले सीआईडी जांच व बाद में न्यायिक जांच के बहाने मध्य प्रदेश सरकार ने इस पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया और चुपके से खात्मा रिपोर्ट (एफ आर) लगा दी गई. एक जनहित याचिका में मप्र हाईकोर्ट ने फरियादियों को जिला न्यायालय में जाकर पक्ष रखने को कहा. जुलाई 2011 से सुनवाई कर रहे जिला न्यायालय ने 3 जुलाई 2012 को दिए अपने फैसले में सन्नी गौर पर धारा 302 के तहत मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in