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बीजापुर मुठभेड़ की जांच नहीं कर सकते जज

बीजापुर मुठभेड़ की जांच नहीं कर सकते जज

रायपुर. 7 जुलाई 2012

रमन सिंह


छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर के बीजापुर के बासागुडा में 28 जून की रात सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई कथित मुठभेड़ की जांच हाईकोर्ट के किसी वर्तमान जज से कराने की भले घोषणा की हो लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को देखा जाये तो हाईकोर्ट के किसी वर्तमान जज को इस तरह की जांच के लिये नियुक्त ही नहीं किया जा सकता. 9 अप्रैल 2007 के अपने एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि ऊपरी न्यायालय के किसी जज को जांच आयोग का जिम्मा नहीं दिया जा सकता.

गौरतलब है कि बीजापुर जिले के बासागुड़ा के पास कथित पुलिस-नक्सली मुठभेड़ में 17 लोगों के मारे जाने की घटना पर कई सवाल खड़े हो गये हैं. मारे जाने वालों को लेकर ग्रामीणों का कहना है वे सभी एक बैठक कर रहे थे और उनमें कोई भी नक्सली नहीं था. मारे जाने वालों में 7 नाबालिग बच्चे भी शामिल हैं. इस कथित मुठभेड़ को लेकर जब विपक्ष ने सरकार को घेरा तो गुरुवार को मुख्यमंत्री रमन सिंह द्वारा मंत्रिमंडल की बैठक में हाईकोर्ट के जज से इस मामले की जांच का फैसला लिया गया. न्यायिक जांच के सात बिंदु तय किए गए. मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से आग्रह किया जाएगा कि पूरी घटना की जांच के लिए एक जस्टिस को नियुक्त किया जाए.

लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार के इस निर्णय के उलट उच्चतम न्यायालय का साफ निर्देश है कि किसी वर्तमान जज को इस तरह के किसी जांच के लिये नियुक्त नहीं किया जा सकता. हाईकोर्ट के किसी सेवारत न्यायाधीश की नियुक्ति करने का फैसला राज्य के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा नहीं लिया जा सकता. हालांकि कुछ विशेष अति विशिष्ठ मामलों में ऐसा करने का अधिकार सर्वोच्च न्यायालय और राष्ट्रपति को है.

कलिंगनगर पुलिस फायरिंग के मामले में सुनवाई करते हुये सुप्रीम कोर्ट की अरिजीत पसायत और डीके जैन की बेंच ने साफ किया था कि हाईकोर्ट के किसी वर्तमान जज को किसी जांच कमेटी में नियुक्त नहीं किया जा सकता.सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2006 के अपने पुराने फैसले का हवाला देते हुये कहा कि उपरी अदालतों में जिस तरह से मुकदमे पड़े हुये हैं, उसमें किसी जज की सेवाएं किसी जांच आयोग के लिये लिया जाना मुश्किल है. आम तौर पर इस तरह के जांच आयोग के नतीजे केवल अनुशंसा तक सीमित हैं और इन अनुशंसाओं को मानने के लिये सरकार बाध्य नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में कहा कि अगर इस तरह की कोई जांच कमेटी कार्यरत हो तो उस पर भी रोक लगाई जानी चाहिये. ओडीशा सरकार ने दलील दी थी कि ओडीशा हाईकोर्ट के वर्तमान जज ए एस नायडु द्वारा की जा रही कलिंग नगर पुलिस फायरिंग की जांच को मान्य किया जाये. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने से साफ इंकार कर दिया.


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