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डीएनएस चेंजर से 3 लाख कंप्यूटर होंगे बंद

डीएनएस चेंजर से 3 लाख कंप्यूटर होंगे बंद

न्यूयार्क. 9 जुलाई 2012

डीएनएस चेंजर वायरस


डीएनएस चेंजर नामक वायरस भारत के 21 हजार कंप्यूटरों को बंद कर सकता है. दुनिया भर में इस वायरस से ग्रस्त कंप्यूटरों की संख्या 3 लाख के आसपास है. ऐसे कंप्यूटरों की संख्या अमरीका में 69,500 कंप्यूटर, इटली में 26,500 कंप्यूटर, भारत में 21,300 कंप्यूटर और ब्रिटेन में 19,589 कंप्यूटर है. इसे लेकर पहले से ही इंटरनेट उपयोक्ताओं में चर्चा जारी थी और सोशल नेटवर्किंग पर इसे लेकर बहस भी चल रही थी.

गौरतलब है कि हैकरों ने एक ऐसा वायरस डीएनएस चेंजर बनाया था जो इंटरनेट ट्रैफिक को फर्जी वेबसाइटों की तरफ मोड़ देता था. इसके कारण उपयोगकर्ता को कुछ पता भी नहीं चलता था और उपयोगरकर्ता के कंप्यूटर से तमाम जानकारियां हैकरों के पास पहुंच जाती थी. एक एजेंसी के अनुसार 2007 में इसका पता चलने पर पिछले साल ऑपरेशन घोस्ट क्लिक के तहत एफबीआई ने डीएनएस चेंजर से जुड़े सर्वरों पर कब्जा कर लिया. जिन कंप्यूटरों पर वायरस डाले गये थे, उनकी संख्या 40 लाख के आसपास थी. इसमें से 3 लाख कंप्यूटरों को छोड़ कर एफबीआई ने सभी कंप्यूटरों को वायरस से मुक्त कर लिया.

इसके बाद इनकी जगह टेंपरेरी सर्वरों को लगा दिया ताकि वायरस से ग्रस्त कंप्यूटर एकदम ना बंद हो जाएं. लेकिन 9 जुलाई को एफबीआई इन टेंपरेरी सर्वरों को बंद करने जा रही है. इस सर्वर के बंद होने से कई कंप्यूटरों की इंटरनेट सेवा बंद हो जाएगी.

बीबीसी के अनुसार नौ जुलाई, सोमवार को जब इन सर्वरों को बंद किया जाएगा तो ऐसे कंप्यूटर जिनमें डीएनएस चेंजर का प्रभाव है, उनमें इंटरनेट काम करना बंद कर देगा. इसका अर्थ ये है कि जब आप कंप्यूटर पर कोई डोमेन नेम डालेंगे तो आपका कंप्यूटर उस पते को तलाश नहीं कर सकेगा.
एफ़-सेक्योर में इंटरनेट की सुरक्षा पर शोध करने वाले श्याँ सुलिवान कहते हैं, "जैसे ही सर्वर बंद होंगे लोगो को एकाएक समझ में नहीं आएगा कि कंप्यूटर पर कुछ चीज़ें काम कर रहीं हैं और कुछ काम क्यों नहीं कर रही हैं."

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि बची हुई मशीनों यानी कंप्यूटरों की सफ़ाई में कुछ वक़्त लगेगा. हालांकि उनका कहना है कि इसका असर बहुत व्यापक नहीं होगा क्योंकि इन कंप्यूटरों में से बहुत से अब काम में नहीं लाए जा रहे हैं.


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