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बुश हाउस से बीबीसी का अंतिम प्रसारण

बुश हाउस से बीबीसी का अंतिम प्रसारण

लंदन. 12 जुलाई 2012 बीबीसी

बुश हाउस


अंतरराष्ट्रीय रेडियो प्रसारण का पर्याय बन चुके ‘बुश हाउस’ से 12 जुलाई 2012 को आखिरी बार कार्यक्रम प्रसारित किए जाएंगे. दशकों तक यहां से प्रसारण करने के बाद अब बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के पत्रकार एक नई इमारत से प्रसारण कर रहे हैं जिसका नाम ‘न्यू ब्रॉडकास्टिंग हाउस’ है. बीबीसी वर्ल्ड सर्विस और हिंदी सेवा के श्रोता बुश हाउस के नाम और उसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से अनजान नहीं हैं.

इसका निर्माण बुश टर्मिनल कंपनी के इरविंग टी बुश ने करवाया था जिनके नाम पर ही बाद में इस इमारत का नाम रखा गया. साल 1919 में ही उनको लंदन में एक व्यापार केंद्र बनाने की अनुमति दी गई.

इरविंग टी बुश की योजना एक ऐसी इमारत बनाने की थी जो सभी सुविधाओं से युक्त हो और जहां अंतरराष्ट्रीय व्यवसायी अपने उत्पादों का प्रदर्शन कर पाएं. साल 1923 में जब इमारत का केंद्रीय खंड बनकर तैयार हुआ उस समय व्यापार और निर्माण क्षेत्र मंदी की मार से ग्रस्त था.

जिस मूल उद्देश्य से इमारत को बनाया जा रहा था उसमें मंदी की वजह से परिवर्तन किए गए और इसके बाकी खंड परम्परागत कार्यालयों की तरह विकसित किए गए. इसके बावजूद बुश हाउस की आत्मा बरकरार रखी गई और ऑल्डविच एंट्रेंस में इंग्लैंड और अमरीका की प्रतीकात्मक आकृतियां लगाई गई. इन आकृतियों के बीच संदेश लिखा था, “टू द फ्रेंडशिप ऑफ इंग्लिश स्पीकिंग पीपल.”

निर्माण पूरा होने के बाद बुश हाउस दुनिया की सबसे महंगी इमारत थी, इसे बनाने में उस ज़माने में एक करोड़ डॉलर की लागत आई थी. बुश हाउस के कमरों और हॉल के फर्श भारतीय लकड़ियों से बने हैं, इसमें एक बैंडमिंटन कोर्ट, सिनेमा हॉल और स्विमिंग पूल भी था जिसे बाद में एक ड्रामा स्टूडियों में परिवर्तित कर दिया गया.

बुश हाउस में विदेशी भाषाओं में कार्यक्रमों के प्रसारण शुरू किए जाने के बाद साल 1940 में बीबीसी की यूरोपीय सर्विस भी वहीं स्थापित की गई.

दूसरे विश्व युद्ध के दौरान भी बुश हाउस से प्रसारण जारी रहे, सिर्फ1944 में कुछ समय के लिए प्रसारण तब रोके गए जब एक बम ऑल्डविच के पास आ गिरा. साल 1958 में बीबीसी की ओवरसीज़ सेवा भी बुश हाउस में स्थापित कर दी गई जिसे आज हम बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के नाम से जानते हैं. यहां से हिंदी में प्रसारण पहली बार 11 मई 1940 को हुआ था, इसी दिन विंस्टन चर्चिल ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने थे.

बीबीसी हिन्दुस्तानी सर्विस के नाम से शुरु किए गए प्रसारण का उद्देश्य द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप के ब्रितानी सैनिकों तक समाचार पहुँचाना था. भारत की आज़ादी और विभाजन के बाद हिन्दुस्तानी सर्विस का भी विभाजन हो गया और 1949 में जनवरी महीने में इंडियन सेक्शन की शुरुआत हुई. बुश हाउस से बीबीसी के गहरे संबंध होने के बावजूद बीबीसी का इस इमारत पर मालिकाना हक कभी नहीं रहा. बुश हाउस का वर्तमान मालिकाना हक भी एक जापानी कंपनी के पास है.


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