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अमरमणि त्रिपाठी की उम्रकैद की सजा बरकरार

अमरमणि त्रिपाठी की उम्रकैद की सजा बरकरार

नैनीताल. 16 जुलाई 2012

अमरमणि त्रिपाठी


मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में उत्तरप्रदेश हाईकोर्ट ने समाजवादी पार्टी के पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी और उसकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी की आजीवन सजा को उचित ठहराया है. सोमवार को नैनीताल हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुये त्रिपाठी और उसकी पत्नी की सजा को बरकरार रखा है.

उत्तरप्रदेश के इस बहुचर्चित हत्याकांड में अमरमणि त्रिपाठी और उसकी पत्नी पर 9 मई 2003 को कवियत्री मधुमिता शुक्ला की हत्या का आरोप है. मधुमिता शुक्ला की हत्या लखनऊ की पेपर कॉलोनी में की गई थी. आरोप है कि हत्या के समय मधुमिता गर्भवती थी और वह चाहती थी कि उसके बच्चे के पिता यानी अमरमणि त्रिपाठी उससे शादी कर लें. लेकिन अमरमणि इससे मुकर गये और फिर मधुमिता को रास्ते से हटा दिया गया.

इस हत्याकांड में 2007 में देहरादून की सीबीआई अदालत ने पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी, उसकी पत्नी मधुमती त्रिपाठी, भतीजे रोहित चतुर्वेदी और एक अन्यत अभियुक्त को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. इस मामले में एक अन्य अभियुक्त प्रकाश चंद्र पांडे को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया था.

हत्याकांड के इस मामले में आजीवन कारावास झेल रहे इन अपराधियों ने देहरादून की सीबीआई की अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. सोमवार को नैनीताल हाईकोर्ट ने चारों अभियुक्तों की आजीवन कारावास की सजा तो बरकरार रखी ही, इस मामले से बरी किये गये प्रकाश चंद्र पांडे को भी उच्च न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई है.

दूसरी तरफ हत्याकांड में मुख्य शिकायतकर्ता मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला ने राष्ट्रपति को पत्र लिख कर कहा है कि उसकी बहन की हत्या के मामले में आजीवन कारावास झेल रहा अमरमणि त्रिपाठी ने पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी है. निधि शुक्ला ने कहा है कि ऐसे में बेहतर हो कि राष्ट्रपति उसे इच्छा मृत्यु की स्वीकृति दे दें.


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