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इसलिये अनशन कर रही टीम अन्ना

इसलिये अनशन कर रही टीम अन्ना

नई दिल्ली. 24 जुलाई 2012

अन्ना हजारे


25 जुलाई से अनशन पर बैठने से पहले टीम अन्ना ने कहा है कि केंद्र सरकार जो कानून सरकार संसद में लेकर आई है, वो भ्रष्टाचार दूर करने के बजाय भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने के लिए है. संसद में बैठकर सभी पार्टियों ने देश की जनता को धोखा दिया. बिना अनशन, त्याग और बलिदान के अपने देश को महंगाई और भ्रष्टाचार से छुटकारा नहीं मिलेगा. युवाओं को सामने आना पड़ेगा. सच्चाई कभी हार नहीं सकती. हमें पूरा विश्वास है कि जल्द ही भारत भ्रष्टाचार मुक्त होकर रहेगा. तब तक हम लड़ते रहेंगे.

टीम अन्ना के अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और गोपाल राय ने आरोप लगाया है कि जनलोकपाल बिल में जनता की मांग है कि हर काम की समय-सीमा तय हो. अगर कोई अफसर तय समय-सीमा में काम नहीं करता, तो लोकपाल की जिम्मेदारी होगी कि वो उस अफसर की तनख्वाह काटकर शिकायतकर्ता को मुआवजे के तौर पर दें और शिकायतकर्ता का काम 30 दिन में कराएं. लेकिन सरकार को दोनों बातें पसंद नहीं हैं. सरकार ने दोनों बातें मानने से मना कर दिया. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बार-बार कहते रहे हैं कि हम सख्त जनलोकपाल कानून लाएंगे, लेकिन जो कानून सरकार संसद में लेकर आई है, वो भ्रष्टाचार दूर करने की बजाय भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देने के लिए है.

अरविंद केजरीवाल और उनके साथियों का कहना है कि प्रधानमंत्री द्वारा संसद में प्रस्तुत लोकपाल बिल की निम्नलिखित दो बातों से यह साबित हो जाता है कि अगर कोई नागरिक लोकपाल को भ्रष्टाचार की शिकायत करेगा और उसकी शिकायत झूठी पाई गई या उसमें पर्याप्त सबूत नहीं हुए, तो उस नागरिक को कम से कम दो साल की जेल की सजा हो सकती है और यदि भ्रष्टाचार साबित हो गया, तो भ्रष्टाचारी अफसर/नेता को छह महीने की कैद होगी. प्रश्न उठता है कि ये कानून नागरिकों के खिलाफ है या भ्रष्टाचारियों के खिलाफ. ऎसा प्रतीत होता है कि सरकार के मन में भ्रष्टाचारियों के लिए बहुत दया है. अभी तक कानूनी प्रावधान ऎसे थे कि यदि कोई व्यक्ति भ्रष्टाचार करते हुए पकड़ा जाता था, तो उसे अपना वकील खुद करना पड़ता था. प्रधानमंत्री ने इस विधेयक में पहली बार लिखा है कि भ्रष्टाचारी व्यक्तियों को सरकार अब से मुफ्त में वकील देगी.

टीम अन्ना ने आरोप लगाते हुये कहा है कि सरकार द्वारा संसद में प्रस्तुत ऎसा लोकपाल बिल क्या उन करोड़ों लोगों के साथ धोखा नहीं है, जो अन्ना आंदोलन के दौरान एक भ्रष्टाचार मुक्त भारत का सपना लेकर उतरे थे? ऎसा ही नहीं कि केवल कांग्रेस ही इस बिल के खिलाफ है, कोई भी पार्टी सख्त कानून नहीं चाहती है, क्योंकि अधिकतर पार्टियों ने मौका मिलने पर देश को लूटा है. 27 दिसंबर 2011 को लोकसभा में जब यह बिल प्रस्तुत किया गया, तो बहस के दौरान सभी पार्टियों की पोल खुल गई.

भाजपा पर निशाना साधते हुये टीम अन्ना ने कहा है कि भाजपा की तरफ से सुषमा स्वराज जी ने कहा कि सीबीआई को सरकार से स्वतंत्र किया जाए, क्योंकि सरकार सीबीआई का दुरूपयोग करती है. लेकिन शायद भाजपा की नीयत ठीक नहीं है. भाजपा ने लोकसभा में जो संशोधन प्रस्ताव प्रस्तुत किए, उनमें सीबीआई को स्वतंत्र करने की बात नहीं की. भाजपा की भी पोल खुल गई. भाजपा को लगता है कि दो साल बाद उन्हें सरकार बनानी है, तब सीबीआई उनके भी काम आएगी. संसद में बैठकर सभी पार्टियों ने देश की जनता को धोखा दिया.

टीम अन्ना ने कहा है कि मनमोहन सिंह जी के मंत्रिमंडल में 34 में से 15 मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के इतने संगीन आरोप लगे हैं कि आज अगर जनलोकपाल पास हो जाए, तो इनमें से अधिकतर मंत्रियों को जेल हो जाएगी और इनकी संपत्ति जब्त हो जाएगी. हमें समझ में आने लगा कि जब तक मंत्रिमंडल में भ्रष्ट मंत्री रहेंगे, तब तक लोकपाल बिल नहीं आएगा. हमने इन 15 मंत्रियों के खिलाफ सारे सबूत इकटा करके दो महीने पहले प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी को भेजे थे, लेकिन उन्होंने इनके खिलाफ निष्पक्ष जांच कराने से साफ मना कर दिया. इसी तरह से संसद में 162 सांसद ऎसे हैं, जिन पर हत्या, ठगी और अपहरण के मुकदमे चल रहे हैं. ये मुकदमे 25-25 साल तक चलते रहते हैं और इस दौरान ऎसे दागी लोग चुनाव जीत कर संसद में बैठकर हमारे लिए कानून बनाते हैं. जब तक ऎसे दागी संसद में बैठे हैं, तब तक हम उम्मीद नहीं कर सकते कि संसद सख्त लोकपाल कानून पारित करेगी.

टीम अन्ना ने अपने अनशन को लेकर कहा है कि हमने प्रधानमंत्री से मांग की थी कि इन लोगों के खिलाफ चल रहे मुकदमे छह महीने में निपटाए जाएं. इसके लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाए जाएं, लेकिन प्रधानमंत्री ने हमारी इस मांग को भी ठुकरा दिया है. अब हमारे पास कोई चारा नहीं रह गया है. 25 जुलाई से हम अनशन पर बैठेंगे. अन्ना हजारे की तबियत ठीक नहीं रहती. हम सब ने मिलकर उनसे निवेदन किया कि इस बार अनशन आप नहीं करेंगे, आप हमारा मार्गदर्शन कीजिए, हमें आशीर्वाद दीजिए. इस बार अनशन आपके युवा साथी करेंगे.


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