पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >मुद्दा >दिल्ली Print | Share This  

बाघ अभयारण्यों में पर्यटन पर रोक

बाघ अभयारण्यों में पर्यटन पर रोक

नई दिल्ली. 25 जुलाई 2012 बीबीसी

बाघ


सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि देश के बाघ अभयारण्यों में कोई पर्यटन गतिविधि नहीं होनी चाहिए वरना संबंधित राज्यों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

न्यायमूर्ति स्वतंतर कुमार और न्यायमूर्ति इब्राहिम कलीफुल्ला की पीठ ने इस आदेश का पालन नहीं होने पर संबंधित राज्यों के खिलाफ न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई और जुर्माना लगाने की चेतावनी भी दी है. पीठ ने अपने आदेश में कहा है, ''हम ये स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि इस कोर्ट से अंतिम दिशा-निर्देश जारी होने तक बाघ अभयारण्यों में कोई पर्यटन गतिविधि नहीं होनी चाहिए.''

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई है कि चार अप्रैल और 10 जुलाई को जारी उसके पूर्ववर्ती दिशा-निर्देशों के बावजूद संबंधित कई राज्यों ने उनका पालन नहीं किया. सुप्रीम कोर्ट ने चेतावनी दी है कि इस बार तीन हफ्तों के भीतर उसके दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया तो संबंधित राज्यों पर 50,000 रूपए का जुर्माना लगाया जाएगा और ये राशि संबंधित राज्य में वन विभाग के मुख्य सचिव से वसूल की जाएगी.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में उसके दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने के लिए आंध्रप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, तमिलनाडु, बिहार, महाराष्ट्र और झारखंड पर दस-दस हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है.

बहरहाल अरुणाचल प्रदेश और झारखंड की पैरवी कर रहे वकीलों ने कहा है कि वे बाघ अभयारण्यों में संबंधित अधिसूचना जारी करने के लिए तैयार हैं और इस बारे में समुचित हलफनामा कोर्ट में दाखिल भी करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने ये दिशा-निर्देश पर्यावरण संरक्षक अजय दुबे की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किए जिसमें बाघ अभयारण्यों में पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगाने की मांग की गई थी.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in