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असम में देखते ही गोली मारने के आदेश

असम में देखते ही गोली मारने के आदेश

गुवाहाटी. 25 जुलाई 2012

असम में हिंसा


असम के कोकराझार और चिरांग जिले में हुई हिंसा में मरने वालों की संख्या 32 तक पहुंच गई है. इस बीच सरकार ने इन इलाकों में उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने के आदेश दिये हैं. इसके अलावा राज्य में सेना की तैनाती कर दी गई है और प्रभावित इलाकों में फ्लैग मार्च जारी है. इधर पुलिस की गोली से 4 लोगों के मारे जाने की खबर है.

गौरतलब है कि गुरुवार को कोकराझार ज़िले में मुस्लिम समुदाय के दो छात्र नेताओं पर अज्ञात लोगों ने गोली चलाई. जवाबी हमले में बोडो लिबरेशन टाइगर्स संगठन के चार पूर्व सदस्य मारे गए. इसके बाद फैली हिंसा में कोकराझार में 12 और चिरांग में पांच लोग मारे गए. पुलिस का कहना था कि चिरांग ज़िले के हसारो बाज़ार इलाके में अज्ञात लोगों ने रविवार शाम को तीन लोगों को मार दिया और इसी ज़िले के बिजनी शहर में एक गिरोह ने दो लोगों की गोली मार कर हत्या कर दी.

पुलिस प्रशासन के अनुसार अभी भी दूरदराज के इलाकों में छिटपुट हिंसा हो रही है और लोगों से अपील की जा रही है कि अफवाहों पर न जाएँ और अपने घरों में ही रहें. साथ ही ये भी कहा जा रहा है कि बोडो के इलाकों में अल्पसंख्यकों के ज़मीन कब्जा करने के कारण भी हिंसा भड़की है. 40 जोन को संवेदनशील घोषित किया गया है और छह अर्धसैनिक बलों की कंपनियां तैनात की गई है. कोकराझार में शुरू हुई हिंसा की चपेट में कोकराझार के अलावा, चिरांग, ढ़ु्ब्री और अब बोंगई गांव जिला भी आ गया है.

कोकराझार के हिंसाग्रस्त इलाकों में प्रशासन ने उपद्रवियों को देखते ही गोली मारने के आदेश दे रखे हैं और अनिश्चित काल का कर्फ्यू जारी है जबकि चिरांग और ढ़ु्ब्री जिले में रात का कर्फ्यू लगाया गया है. हिंसा ज्यादातर उन इलाकों में है जो बोडोलैंड टेरीटोरियल एरियाज डिस्ट्रिक्ट यानी बीटीएडी में आते हैं. हिंसा से प्रभावित जिलों के लोगों के लिए 64 शरणार्थी कैंप खोले गए हैं. ऐसे कैंपों में अबतक करीब 62 हजार लोग पहुंच चुके हैं. इन शरणार्थियों में बोडो और मुसलमान दोनों शामिल हैं.

इधर राज्य में शांति बहाली के लिए केंद्र सरकार की ओर से 1400 अर्धसैनिक बलों को भेजा गया है. कुल मिलाकर सीआरपीएफ की 18 कंपनियां तैनात कर दी गई हैं. शांति बहाली के लिए सेना ने हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में फ्लैग मार्च किया. प्रधानमंत्री और सोनिया गांधी ने भी मुख्यमंत्री से असम के हालात का जायजा लिया.


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