पहला पन्ना >कला >संस्मरण Print | Share This  

राजेश खन्ना के अंतिम बोल प्रशंसकों के लिये

राजेश खन्ना के अंतिम बोल प्रशंसकों के लिये

मुंबई. 25 जुलाई 2012

राजेश खन्ना


फिल्म स्टार राजेश खन्ना ने अपनी बीमारी की खबरों के दौरान अपने प्रशंसकों के लिये एक ऑडियो संदेश रिकार्ड किया था, जिसे उनके निधन के बाद उनके परिजनों ने सार्वजनिक किया है. इस ऑडियो में राजेश खन्ना ने जो कुछ कहा है, वह इस प्रकार है-

मेरे प्यारे दोस्तो, भाइयो और बहनो, नॉस्टै ल्जिया में रहने की आदत नहीं है मुझे. हमेशा भविष्यभ के बारे में ही सोचना पड़ता है. जो दिन गुजर गए हैं, बीत गए हैं, उस का क्यार सोचना. लेकिन जब जाने-पहचाने चेहरे अनजान सी एक महफिल में मिलते हैं तो यादें बाविस्ता हो जाती हैं. यादें फिर दोबारा लौट आती हैं.

कभी-कभी मुझे ऐसे लगता है जैसे सौ साल पहले जब मैं दस साल का था, तब से हमारी मुलाकात है. मेरा जन्म थिएटर से हुआ. मैं आज जो कुछ भी हूं, ये स्टेतज, ये थिएटर की बदौलत. मैंने जब थिएटर शुरू किया तो मेरे थिएटरवालों ने मुझे यूनियर आर्टिस्ट का रोल दिया था. एक इंस्पेक्टर का, जिसका सिर्फ एक ही डायलॉग था कि खबरदार नंबरदार भागने की कोशिश की, पुलिस ने चारों तरफ से घेर रखा है तुम्हें. ये डायलॉग था. तो उसमें मैं जैसे सेकंड ऐक्ट में गया तो मैंने जाकर कहा, नंबरदार खबरदार, तुमने भागने की... उसके बाद डायलॉग भूल गया. तो वीके शर्मा जो थे, हीरो थे, उन्होंने कहा, हां-हां, इंस्पेक्टर साहब का यह कहना है कि भागने की कोशिश न करना, पुलिस ने चारों तरफ से तुम्हें घेर रखा है.

जो डायलॉग मैंने बोलना था, उन्होंने पूरा किया क्योंकि मैं डायलॉग भूल गया. उसके बाद मुझे बहुत डांट पड़ी, मैं बहुत रोया भी. मैंने कहा कि भई राजेश खन्ना तुम ऐक्टर बनना चाहते हो और एक लाइन तो तुमसे बोली जाती नहीं है. शर्म की बात है, लानत है तुमपे. मैंने बहुत कोसा अपने आप को और मैंने कहा कि कभी ऐक्टर नहीं बन सकता.

लेकिन फिर भी भगवान की मुस्कान समझ लीजिए, जिद समझ लीजिए. मैंने कहा, कुछ न कुछ तो करूंगा, करके बताऊंगा. मैं जब फिल्मोंक में आया तो मेरा कोई गॉडफादर नहीं था. मेरे फिल्म में कोई रिश्तेभदार या कोई सर पर हाथ रखने वाला नहीं था. मैं आया थ्रू द यूनाइटेड प्रड्यूसर्स फिल्म फेयर टैलंट कॉन्टेतस्टै. कॉन्टेस्ट छपा फिल्मफेयर में, टाइम्स ऑफ इंडिया में, हमने कैंची लेकर उसे काटा, उसे भरा और वहां लिखा था प्लीज़ सेंड थ्री फोटोग्राफ्ट. हमने तीन फोटो भेजीं. हमको बुलाया गया. टाइम्सइ ऑफ इंडिया में था यूनाइटेड प्रड्यूसर्स. वहां पर बड़े-बड़े प्रड्यूसर्स थे. चाहे वह चोपड़ा साहब थे, बिमल रॉय थे, एसएस द्रविड़ थे... शक्ति सामंत थे, बहुत सारे थे.

तो उन्हों ने कहा कि हमने आपको डायलॉग भेजा है, वो याद किया आपने? तो मैं सामने कुर्सी पर बैठा था और वे एक बड़ी सी टेबल में लाइन में. इतने बड़े-बड़े प्रड्यूसर्स थे, मुझे ऐसा लग रहा था जैसे कोर्ट मार्शल हो रहा है. जैसे ये बंदूक निकालेंगे और मुझे मार डालेंगे, गोली चला देंगे. क्योंकि सामने अकेली एक कुर्सी थी बस. तो मैंने कहा कि डायलॉग तो मैंने पढ़ा है लेकिन यह जो डायलॉग है, आपने यह नहीं बताया कि इसका कैरक्टकराइजेशन क्यार है? कि हीरो अपनी मां को समझाता है कि मैं एक नाचनेवाली से प्यार करता हूं लेकिन मैं उसको तेरे घर की बहू बनाना चाहता हूं. दिस वाज़ द डायलॉग जिसका मेन रोल था. मैंने कहा, आपने न कैरक्टदर बताया मां का, न बताया हीरो का कि भई अमीर है, गरीब है, मां सख्त , कड़क है, नरम है, क्या है, मिडल क्लाईस है, यह आदमी पढ़ा-लिखा, अनपढ़ है या कुछ भी नहीं, तो चोपड़ा साहब ने मुझे झट से कहा कि तुम थिएटर से हो? मैंने कहा जी....

मैंने कहा, डायलॉग तो आपने लिखके भेज दिया कि इस तरह मां को कन्विंकस करना है. डायलॉग बोलिए लेकिन आपने कैरक्टलराइजेशन नहीं बताया. यह कोई स्टेतज का ऐक्टबर ही बोल सकता है. तो बोले अच्छाी ठीक है भई, तुम कोई भी अपना एक डायलॉग सुनाओ. अब काटो तो खून नहीं, पसीना छूट रहा था. मैंने कहा, क्यात डायलॉग बोलूं... और ये सब बड़े-बड़े लोग. इनकी पिक्च रें हमने 10-10 बार देखी हुईं, प्रड्यूस-डायरेक्टई की हुईं.

मुझे भगवान के आशीर्वाद से एक ऐसे राइटर का डायलॉग याद आया. मुझको यारों माफ करो. उसे प्ले का डायलॉग क्योंकि मैंने वह प्ले किया हुआ था. तो मुझे वह डायलॉग याद आया और मैंने उनसे कहा कि मैं इस कुर्सी से उठ सकता हूं. तो कहा, हां-हां, जो करना है करिए लेकिन आप करके बताएं कि क्या करेंगे. तो थोड़ा नर्वस भी हुआ. जिस तरह से बोला, मुझे लगा डांट के बोल रहे हैं. जो डायलॉग है, जिसकी वजह से मैं फिल्मों में आया. मुझे जीपी सिप्पी् ने चांस दिया 40 साल पहले, 'हां, मैं कलाकार हूं, हां मैं कलाकार हूं क्याे करोगे मेरी कहानी सुनकर? आज से कई साल पहले होनी के बहकाने से एक ऐसा प्याला पी चुका हूं, जो मेरे लिए जहर हो या अमृत... एक ऐसी बात जिसका इकरार करते हुए मेरी जुबान पर छाले पड़ जाएंगे, लेकिन फिर भी कहता हूं कि जब मैं छोटा था, एक खौफनाक वाक्या पेश आया क्योंकि मैं एक भयानक आग में फंस गया. जब जिंदा बचा तो मालूम हुआ कि मैं बदसूरत हो गया हूं. जैसे सुहानी सुबह डरावनी रात में पलट गई हो. मैं बाहर जाने से घबराने लगा और घर में बैठकर गीत बनाने लगा. जितना भयानक था मेरा चेहरा, उते मधुर थे मेरे गीत. दुनिया ने मुझे दुत्कारा लेकिन मेरे गीतों से प्यार करने लगे और मैं चिल्लाता रहा कि तुमने चांदनी रातों से मोहब्बत और मैं आंखों से बरसाता हूं सितारे. मेरे गीतों ने हजारों को लूटा मेरी मुलाकात की मिन्नतें होती रहीं. पर मैं किसी से न मिलता. एक दिन एक खत आया, मैंने तुम्हारे गीतों में शांति पाई अगर मुलाकात न हुई तो न जाने क्या कर बैठूंगी. मुझे लगा यह खूबसूरत हसीना. बुलाऊं इसे. यह बदसूरत चेहरा दिखाकर पूरी ताकत से इंतकाम लूं. मैंने उसे बुलाया. वह आई. कितनी खूबसूरत और हसीन. शबनम से भी मुलायम और मैं जैसे, मासूम के सामने मायूसी... मैं चेहरा छुपा के बातें करता रहा, मेरे गीत शुभनमे थे. मैंने शादी का प्रस्ताव पेश किया. और वह खुशी से बोली, हां मुझे मंजूर है. मैं खुद सहम गया, मैंने चिल्ला के पूछा, कौन हो, कहां से आई हो तुम... उसने धीरे से आंसू बहाते हुए कह दिया कि मैं... मैं तो एक अंधी हूं. मैंने उसकी आंखों में देखा, उसकी आंखों में इश्क था. तब मैंने कहा कि तीर निगाह का बिस्मिल नहीं, वह कहने को दिल तो है मगर दिल नहीं...

फिल्मों में आ तो गया लेकिन आने के बाद वह खूबसूरत कामयाबी कि सीढ़ी चढ़ने का मौका, यह सेहरा तो आपके सर है... कि आप हैं, जिन्होंने मुझे ऐक्टर से स्टार बनाया. स्टार से सुपर स्टार बनाया. किन अल्फाजों में आपका शुक्रिया अदा करूं, मुझे समझ में नहीं आता. प्यार आप मुझे भेजते रहे, प्यार वह मुझे मिलता रहा लेकिन उस प्यार को मैं कभी वापस लौटा नहीं पाया. लेकिन जो भी कहना चाहूंगा, जिन अल्फाजों में भी आपका शुक्रिया अदा करना चाहूंगा... वह मेरी दिल की सचाई होगी. मेरी ईमानदारी होगी. मेरा जमीर होगा. आज मेरा दिल हल्का हुआ, आपसे गुफ्तगू करके, बात करके और आपका मैंने शुक्रिया अदा किया. मुझे खुद को अच्छा लग रहा है कि चलिए इस बहाने आपसे मुलाकात हुई. किसे अपना कहें कोई इस काबिल नहीं मिलता, किसे अपना कहें कोई इस काबिल नहीं मिलता, यहां पत्थर तो बहुत मिलते हैं लेकिन दिल नहीं मिलता.

तो दोस्तों, आपका एक हिस्सेतदार मैं भी हूं. और जैसे मैंने पहले भी कहा कि आपने आपका कीमती वक्तआ निकालकर, आपका ये प्यादर था कि आप मौजूद हुए और इतनी भारी संख्याक में... तो मैं यही कहूंगा कि बहुत-बहुत शुक्रिया, थैंक यू और मेरा बहुत-बहुत सलाम.