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अन्ना ने भंग की टीम और कहा..

अन्ना ने भंग की टीम और कहा..

नई दिल्ली. 6 अगस्त 2012

अन्ना हजारे


अन्ना हजारे ने टीम अन्ना भंग करते हुये कहा है बार-बार अनशन करने से कोई फायदा नहीं हुआ. सरकार जनलोकपाल कानून बनाने के लिए राजी नहीं है. टीम अन्ना का गठन जनलोकपाल के लिए हुआ था, लेकिन अब सरकार से बातचीत नहीं करने की वजह से इसका काम खत्म हो गया है. अन्ना हजारे के अनुसार लोगों की मांग हमसे बढ़ती जा रही थी, अब अनशन छोड़ो और जनता को नया विकल्प दो. मांगों को देखते हुए मैंने भी सोचा आज की सरकार से देश का भ्रष्टाचार कम नहीं हो सकता क्योंकि सरकार की ऐसी मंशा ही नहीं है. इसलिए जनता को दूसरा विकल्प देना ही अब रास्ता है.

अपने ब्लॉग पर अन्ना हजारे ने जो लिखा है, उसका पूरा मजमून इस तरह है-

टीम अन्ना का कार्य समाप्त हो गया है. जनलोकपाल कानून सरकार बनाने के लिए राजी नहीं है. कहां तक बार-बार अनशन करते रहोगे. अब अनशन छोड़ो और देश की जनता को विकल्प दे दो. यह मांग जनता से बढ़ती गई. मैंने भी सोचा आज की सरकार से देश का भ्रष्टाचार कम नहीं हो सकता. कारण, सरकार की मंशा ही नहीं है. जनलोकपाल कानून से भ्रष्टाचार दूर होगा. यह देशवासियों की आशा थी. लेकिन डेढ साल बीत गए. बार-बार जनता ने आंदोलन करने के बाद भी सरकार जनलोकपाल कानून लाने को तैयार नहीं. अच्छे लोगों को खोज करके जनता को विकल्प देना. यह अच्छा रास्ता है. ऐसा मुझे लगा. लेकिन होगा कैसे? यह मेरे सामने प्रश्न है.

मुझे विकल्प देने की बात करने वाले लोगों के सामने जंतर मंतर पर खुलेआम मैंने एक प्रश्न खड़ा किया. आप विकल्प की बात करते हैं. मैं देशभर में दौरे करूंगा. लोगों को जागरूक करूंगा अच्छे सदाचारी, राष्ट्रीय दृष्टिकोण है, सामाजिक दृष्टिकोण है, सेवा भाव है ऐसे लोग संसद में नहीं जाएंगे तब तक बदलाव नहीं आएगा. यह बात मुझे मंजूर है लेकिन-

1. ऐसे लोगों की खोज करने का तरीका क्या होगा?

2. विकल्प देने के लिए पार्टी बनानी होगी. उस पार्टी बनाते समय पार्टी सदस्य चुनने का तरीका क्या होगा?

3. आज अधिकांश पार्टी बोर्ड लगाती हैं. सभासद नोदनी (रजिस्ट्रेशन) का काम चालू है. भ्रष्टाचारी हो, गुंडा हो, व्यभाचारी हो, लूटारू हो इनको न देखते हुए भी सभासद बनाती है. इस प्रकार के सभासद बनाए तो इस आंदोलन का क्या होगा?

4. मैं खुद कोई पक्ष-पार्टी में नहीं बनाऊंगा. मैं चुनाव नहीं लडूंगा. लेकिन जनता के सामने विकल्प देने के लिए जरूर प्रयास करूंगा.

5. आज एक चुनाव के लिए 10 से 15 करोड़ रुपए से भी ज्यादा खर्चा होता है. देश को विकल्प देने के लिए इतना पैसा कहां से लाएंगे?

6. चुनाव में चुनकर आने के बाद उनकी बुद्धि का पालट हो गया तो क्या विकल्प है? कारण, जनता चुनकर देते समय अच्छा उम्मीदवार है यह समझकर ही चुनकर देती है. लेकिन कुर्सी का गुण-धर्म है कि कई लोगों की बुद्धि पलट जाती है और स्वार्थ के कारण वह भ्रष्टाचार करने लगते है. जैसे आज कई पार्टियों में दिखाई दे रहा है. उसके बारे में क्या सोच है? ऐसे लोगों की मानटरिंग करने का तरीका क्या है?

7. आज पकृति और मानवता का दोहन हो रहा है और सरकार उसे नहीं रोक रही. यह देश के लिए बड़ा खतरा है. क्या विकल्प होगा?

8. जंतर मंतर पर जो हजारों लोग आए थे उनको टीम ने पूछा कि विकल्प देना चाहिए या नहीं और सभी ने हाथ ऊपर उठाए. ये अच्छी बात है. लेकिन सिर्फ जंतर मंतर देश नहीं है. देश बहुत बड़ा है. उनकी भी राय लेना जरूरी है. मेरी अपेक्षा है. देश में 6 लाख गांव हैं. इन सभी गांव की ग्रामसभा की ग्रामसभाओं ने अपना सुझाव पारित करना है कि हम विकल्प मांगते है. इसलिए हमारी ग्रामसभा का सुझाव आपको भेजते हैं कि संसद में अच्छे लोग जाए इस बात से हमारी सहमति है. ग्रामसभा संभव नहीं है वहां पर व्यक्ति ने फार्म पर हस्ताक्षर करके कहने है कि हम विकल्प के लिए तैयार है.

9. जिस प्रकार गांव में ग्रामसभा का सुझाव होगा उसी प्रकार नगर परिषद्, नगरपालिका, महापालिका में वार्ड सभा और मोहल्ला सभा का भी सुझाव करना होगा. तब स्पष्ट होगा कि लोकसभा में अच्छे लोगों को भेजने की जनता की तैयारी है.
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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

pksnaidu [pks.naidu@hotmail.com] Hyderabad - 2012-08-18 00:41:19

 
  Anna you are not fail. but is/ips /other /taking you away. so plz fight him self. India with you . 
   
 

mithilesh [mkverma2811@rediffmail.com] suhela - 2012-08-06 14:06:23

 
  अन्ना हज़ारे जी को स्वामी रामदेव के अनशन 9 अगस्त 2012 तक अपना आमरण अनशन रोकना था. अब आमरण अनश हो या अनशन को अन्ना जी ने आज केवल मजाक बना दिया है. आमरण अनशन घोषणा के बाद राजनीति में जाना उचित नहीं लगता चूंकि अनशन एक आखिरी विकल्प होता है. गांधी जी के अचूक हथियार को अन्ना जी ने गलत साबित कर दिया. लेकिन आज देशभर में स्वामी रामदेव जी ऐसे व्यक्ति है जो चोट खाने या सरकार के साजिशों के शिकार के बाद भी अपनी बात पर अडिग है. प्राण जाए पर वचन न जाए. आज व्यक्ति की नहीं व्यक्तित्व की पूजा होती है. वंदे मातरम. 
   
 

dr r k diwakar [rkdiwakar49@yahoo.co.in] Bhilai (Durg) - 2012-08-06 11:55:09

 
  Respected Shri Anna Hazareji,
Sadar pranam.I highly appreciate your hardwork and earnest efforts for the countrymen. The work done so far in this direction will bring change in the scenario of the country politics. The most important thing is to get good people for this cause. I have very little experience in the field of politics.The first two aims at top priority are to find out sources of fund and the other is to find out able & devoted candidates.I have some suggestions in my mind. If you say \"Yes\" I can communicate them to you.With regards:Dr Diwakar
 
   
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