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छत्तीसगढ़ गर्भाशय कांड में सरकार का यू टर्न

छत्तीसगढ़ गर्भाशय कांड में सरकार का यू टर्न

रायपुर. 6 अगस्त 2012

गर्भाशय


प्रदेश के निजी डॉक्टरों की हड़ताल की चेतावनी के आगे आखिर सरकार झुक गई. कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियों का भय दिखाकर कम उम्र की महिलाओं के गर्भाशय निकालने के मामले में फंसे 9 निजी डॉक्टरों का निलंबन सशर्त निरस्त कर दिया गया. वहीं कहा गया है कि उक्त डॉक्टर उच्च स्तरीय जांच रिपोर्ट के आते तक गर्भाशय संबंधी ऑपरेशन नहीं कर सकेंगे.

दूसरी ओर मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए दो सदस्यीय समिति का गठन किया गया है, जिसमें मेडिकल कॉलेज रायपुर की दो स्त्री रोग विशेषज्ञ शामिल हैं. स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि जांच में विलंब को देखते हुए गर्भाशय मामले में फंसे डॉक्टरों के निलंबन निरस्त किए गए हैं.

स्वास्थ्य विभाग की ओर से रायपुर जिले में कम उम्र की महिलाओं के गर्भाशय निकालने की शिकायत पर जांच शुरू की गई. इस दौरान रायपुर शहर, अभनपुर एवं नवापारा-राजिम के 9 निजी अस्पतालों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर वहां के डॉक्टरों के पंजीयन निलंबित कर दिए गए. 21 व 22 जून को पंजीयन निलंबन के बाद मामले की जांच शुरू की गई. पांच स्त्री रोग विशेषज्ञों की टीम ने उक्त सभी डॉक्टरों का बयान दर्ज कर उनके दस्तावेजों की पड़ताल की. जांच में 34 प्रकरणों में पहली नजर में कोई खास कारण न होते हुए भी गर्भाशय निकालने की शिकायतें पाई गई. राज्य में हजारों महिलाओं के गलत तरीके से ऑपरेशन कर के गर्भाशय निकाले गये थे.

बताया गया कि गर्भाशय मामले की जांच रिपोर्ट करीब पखवाड़े भर बाद स्वास्थ्य संचालक डॉ. कमलप्रीत सिंह को सौंपी गई. सीएमओ डॉ. के.आर. सोनवानी के साथ पहुंची जांच टीम ने स्वास्थ्य संचालक को मौखिक तौर पर मामले से अवगत कराया गया. कुछ दिनों बाद यह रिपोर्ट वापस सीएमओ को लौटा दी गई.

इस दौरान कहा गया था कि जांच रिपोर्ट में सभी मामलों में जांच टीम अलग-अलग अभिमत दें. सामूहिक अभिमत से काम नहीं चल पाएगा. जांच टीम से जुड़ी स्त्री रोग विशेषज्ञों ने इस मामले में फंसे सभी 9 डॉक्टरों को फिर से बुलाकर उनका बयान दर्ज किया. उनके दस्तावेजों की भी पड़ताल की. इसके बाद यह रिपोर्ट स्वास्थ्य संचालक को सौंपी गई.

स्वास्थ्य संचालक डॉ. सिंह ने इस रिपोर्ट में एक विशेषज्ञ डॉक्टर का हस्ताक्षर नहीं होने पर उसे तुरंत लौटा दिया. 4-5 दिनों बाद यह जांच रिपोर्ट तीसरी बार स्वास्थ्य संचालक को सौंपी गई. इसके बाद प्रदेश के निजी डॉक्टर भडक़ गए.

इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएएम) के प्रदेश पदाधिकारियों ने रविवार को राजधानी में एक बैठक कर गर्भाशय निकालने के मामले पर जल्द फैसला न देने पर नाराजगी जताई. वहीं उन्होंने चेतावनी दी कि 8 अगस्त तक फैसला नहीं आया तो वे सभी सडक़ पर उतरकर आंदोलन करेंगे. इस दौरान प्रदेश के सभी नर्सिंग होम बंद रहेंगे. निजी डॉक्टरों की इस चेतावनी के आगे प्रदेश सरकार को आखिर झुकना पड़ा. आनन-फानन में एक आदेश जारी कर उक्त सभी 9 डॉक्टरों के पंजीयन निरस्त कर दिए गए. आदेश में ये निलंबन सशर्त निरस्त किए गए हैं. उनसे कहा गया है कि ये डॉक्टर मामले की जांच पूरी होने तक गर्भाशय संबंधी ऑपरेशन नहीं कर सकेंगे. बाकी चिकित्सकीय कार्य कर सकेंगे.

स्वास्थ्य संचालक डॉ. सिंह की ओर से जारी किए गए आदेश में गर्भाशय निकालने के मामले की उच्च स्तरीय जांच के लिए एक और समिति का गठन किया गया है. जांच समिति में दो स्त्री रोग विशेषज्ञ रायपुर मेडिकल कॉलेज की प्राध्यापक डॉ. तृप्ति नागरिया एवं रीडर डॉ. ज्योति जायसवाल शामिल किए गए हैं. यह टीम एक बार फिर गर्भाशय निकालने के मामले की बारीकी से जांच कर मामले की रिपोर्ट शासन को सौंपेगी.

स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिन डॉक्टरों के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं, उनमें डॉ. नलिनी मढरिया, आर्शीवाद हास्पिटल डंगनिया रायपुर, डॉ. धीरेन्द्र साव कर्मा हास्पिटल तेलीबांधा रायपुर, डॉ. नितिन जैन जैन हास्पिटल देवेन्द्र नगर रायपुर, डॉ. मोहिनी इदनानी, सिटी हॉस्पिटल अमलीडीह रायपुर, डॉ. प्रज्जवल सोनी सोनी मल्टी स्पेशलिटी हास्पिटल अभनपुर, डॉ. ज्योति दुबे स्वामीनारायण हास्पिटल लालपुर रायपुर, डॉ. सोनाली जैन, आंचल नर्सिंग होम महावीर नगर रायपुर, डॉ. पंकज जायसवाल, सेवा सदन माता हास्पिटल नवापारा राजिम एवं डॉ. जी.पी.एस. सरना लाईफ लाइन हास्पिटल शैलेन्द्र नगर रायपुर शामिल हैं.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Shubham Tiwari [] Kanpur - 2012-08-07 03:15:54

 
  भाजपा के राज में स्त्रियों की दुर्गति हो गई है और सरकार ऐसे चिकित्सा माफियाओं के साथ मिल कर चांदी काटने में जुटी हुई है. छत्तीसगढ़ की औरतों की आह ऐसे नेताओं और चिकित्सकों को लगेगी और याद रखें, प्रकृति सबका हिसाब कर देगी. 
   
 

Aniket Singh Thakur [] Baikunthpur, Koria, CG - 2012-08-06 13:35:36

 
  Shame Shame chhattisgarh government..... 
   
 

कुणाल गोस्वामी [kunal.goswami@sify.com] बंद टॉकिज के पास, जगदलपुर, छत्तीसगढ़ - 2012-08-06 13:33:58

 
  राज्य भर में चर्चा है कि छत्तीसगढ़ की सरकार ने संघ के दबाव में ऐसा किया है. पैसों के लोभी डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई करके फिर यू टर्न लेने का मतलब है कि सरकार अक्षम हो गई है. यह तो ऐसे ही है कि डकैत लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो और सारे डकैत सरकार के खिलाफ खड़े हो जाएं तो सरकार अपना निर्णय वापस लेकर उनके चरणों में अपना शीश झुका ले. 
   
 

संजय कुमार कुर्रे [sanjay2010@gmail.com] रायपुर - 2012-08-06 13:27:52

 
  छत्तीसगढ़ सरकार का यह शर्मनाक कदम है. यह समझ में नहीं आ रहा है कि जब यही सब कुछ करना था तो सरकार ने लालची डाक्टरों के खिलाफ कार्रवाई क्यों की थी ? सरकार के इस निर्णय से यह बात साफ हो गई है कि रमन सिंह की सरकार केवल फर्जी कार्रवाई कर रही है और ऐसे गुनाहगारों को बचाने और जनता को गुमराह करने के लिये तरह-तरह की हरकतें कर रही है.  
   
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