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लेख चुराने वाले ज़कारिया निलंबित

लेख चुराने वाले ज़कारिया निलंबित

न्यूयार्क. 11 अगस्त 2012

फरीद ज़कारिया


विश्वप्रसिद्ध टाइम पत्रिका और सीएनएन के स्तंभकार फरीद ज़कारिया को एक लेख का हिस्सा चोरी करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है. भारतीय मूल के फरीद ज़कारिया पर आरोप है कि उन्होंने टाइम पत्रिका के लिये लिखे अपने लेख का एक हिस्सा द न्यूयॉर्कर से चुराया था. ज़कारिया ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है.

भारत में इस्लामिक मामलों के विश्वप्रसिद्ध चिंतक रफ़ीक ज़कारिया के बेटे फरीद ज़कारिया के निलंबन के बाद अंग्रेजी पत्रकारिता के क्षेत्र में सनसनी फैली हुई है. हालांकि भारतीय मीडिया में यह कोई मुद्दा नहीं है क्योंकि यहां खासतौर पर हिंदी में दूसरों के लेख अपने नाम से छपवाने वाले चोर लेखकों-पत्रकारों-संपादकों की एक लंबी फेहरिश्त है.

हार्वर्ड विश्वविद्यालय से पढ़े-लिखे फरीद ज़कारिया 26 साल की उम्र में ही फॉरेन अफेयर्स के संपादक बनाये गये थे. इसके बाद उन्होंने राजनीति और विदेशी मामलों के लेखन में अपनी एक खास पहचान बनाई और उनकी लिखीं किताबें दुनिया के शीर्ष किताबों में शामिल हो गईं. बिल क्लिंटन से लेकर बराक ओबामा और मनमोहन सिंह जैसे लोग ज़कारिया के प्रशंसकों में से रहे हैं. वे न्यूजविक जैसी पत्रिका के भी संपादक रहे हैं. लेकिन उनकी ताज़ा हरकत के बाद उनकी पत्रकारिता और किताबों की मौलिकता भी सवालों के घेरे में आ गई है.

फरीद ज़कारिया का एक लेख अमरीका के एक इलाके में शूटिंग की घटनाओं के कारण बंदूकों पर लगाये गए प्रतिबंध को लेकर टाइम पत्रिका में प्रकाशित हुआ था, जिसके बाद विवाद शुरु हो गया. पता चला कि इस लेख का एक हिस्सा किसी और के लिखे हुये की नकल है. खबर आई कि अप्रैल 2012 में न्यू यॉर्कर में पहले ही छपे एक लेख से फरीद ज़कारिया ने यह हिस्सा चुराया था.

बाद में जब अमरीका भर में हंगामा हुआ तो फरीद ज़कारिया ने माफी मांगी और कहा कि मीडिया में यह बात सामने आई है कि टाइम पत्रिका के मेरे कॉलम और 23 अप्रैल को न्यू-यॉर्कर में छपे जिल लैपोर के आलेख में कई समानताएं हैं. ये लोग सही हैं. ये एक बड़ी गलती है और इसके लिए पूरी तरह मैं ज़िम्मेदार हूं. उनके माफीनामे के बाद टाइम पत्रिकार ने फरीद ज़कारिया को निलंबित कर दिया.


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