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राजनीतिक एकजुटता पर मनमोहन का जोर

राजनीतिक एकजुटता पर मनमोहन का जोर

नई दिल्ली. 15 अगस्त 2012

मनमोहन सिंह


प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा है कि विभिन्न मुद्दों पर राजनीतिक सर्वसम्मति न बन पाने की वजह से आर्थिक विकास की गति पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है.उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आर्थिक विकास की गति नहीं बढ़ी, निवेश को बढ़ावा नहीं दिया गया और सरकारी राजकोष का ठीक से प्रबंधन नहीं किया गया तो उसका राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी बुरा असर पड़ेगा. आजादी की वर्षगांठ पर लाल किले से भाषण देते हुये उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि उन मुद्दों पर नज़र डाली जाए जो हमारे विकास के आड़े आ रहे हैं और साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर भी ध्यान दिया जाए. साथ ही उन्होंने लोकपाल विधेयक के मसौदे को राज्य सभा में पारित करवाने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों का सहयोग मांगा है.

मनमोहन सिंह ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कहा कि सरकारी विभागों में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार को खत्म करने की कोशिशें सरकार जारी रखेगी. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने संबोधन में कई मुद्दों पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया लेकिन आर्थिक विकास उनके संबोधन का अहम हिस्सा बना रहा. उन्होंने कहा कि हालांकि हमारे सामने कुछ समस्याएं हैं, लेकिन हमें इस बात से उत्साहित होना चाहिए कि हमने पिछले आठ सालों में बेहतरीन सफलता प्राप्त की है. पिछले साल भारत का सकल घरेलु उत्पाद 6.5 प्रतिशत रहा और इस साल हमें उम्मीद है कि हम बेहतर प्रदर्शन कर पाएंगें. दुनिया की कोई भी ताकत हमें आर्थिक ऊंचाईयां पाने से नहीं रोक सकती.”

उन्होंने कहा कि भारत के सामने जो कठिन समस्याएं हैं, उनका समाधान लोगों की सहभागिता से ही निकल सकता है.हाल ही में पुणे में हुए ब्लास्ट और असम में हुई सांप्रदायिक हिंसा का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत को अपनी आंतरिक सुरक्षा में सुधार लाने के लिए अभी बहुत काम करना होगा. उन्होंने कहा कि असम में हुई हिंसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण थी. हम वो हर कोशिश करेंगें जिससे कि सुनिश्चित हो कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों. मनमोहन सिंह का कहना था कि मानसून में हुई गड़बड़ी की वजह से महंगाई पर काबू पाना मुश्किल साबित हो रहा है.