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पटना में भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की हालत बिगड़ी

पटना में भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों की हालत बिगड़ी

पटना. 15 अगस्त 2012. अनन्त

भूख हड़ताल


पटना विश्वविद्यालय में पिछले 9 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों का आंदोलन 15 अगस्त के दिन भी जारी रहा. आज़ाद देश में अंग्रेजों के संस्कार से रचे-बचे विश्वविद्यालय प्रशासन ने आज भी छात्रों की सुध नहीं ली. विश्वविद्यालय परिसर में कुलपति शंभुनाथ सिंह द्वारा मनाया गया जश्न-ए-आजादी उनकी संवेदनहीनता का प्रतीक बन गया. वे विश्वविद्यालय आये, झंडा फहराया और फिर चल पड़े जश्न-ए-आजादी मनाने. उनकी नजरें आमरण अनशन पर बैठे छात्रों पर नहीं पड़ी. छात्रों के पीले पड़ रहे चेहरे ने उनके दिल को नही झकझोरा. विश्वविद्यालय की इस संवेदनहीनता को लेकर छात्र और शिक्षकों में आक्रोश है.

गौरतलब है कि पटना कालेज के प्राचार्य की बर्खास्तगी, छात्रों पर किये गये फर्जी मुकदमें की वापसी, पुरानी व्यवस्था के तहत छात्रावास का आवंटन, पेयजल एवं आधारभूत सुविधाओं की बहाली, छात्रावास के अंदर पत्र-पत्रिका एवं मेस की व्यवस्था एवं पटना कालेज छात्रों की बढ़ती संख्या को देखते हुये छात्रावासों की संख्या बढ़ाने आदि की मांग को लेकर एआईएसएफ के छात्र पिछले एक महीने से आन्दोलन कर रहे थे. बातचीत से समस्या का समाधान नहीं निकलने पर छात्रों ने अंततः आमरण अनशन करने का फैसला लिया.

पिछले नौ दिनों से आमरण अनशन पर बैठे छात्रों को आजादी के 65 वीं वर्षगांठ के अवसर पर न्याय मिलने आस थी. दरअसल अनशनकारी पिछले नौ दिनों से कुलपति की बाट देख रहे थे. कुलपति बुधवार को विश्वविद्यालय आये और झंडोतोलन कर छात्रों से बातचीत किये बगैर लौट गये. यहां उल्लेखनीय है कि कुलपति खुद कई गंभीर आरोपों के घेरे में हैं. कुलपति पद की योग्यता और अयोग्यता का मामला जहां पटना हाईकोर्ट में है, वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार द्वारा कुलपति के खिलाफ विजलेंस जांच के भी आदेश दिये गये हैं.

इस बीच अनशनकारी छात्रों की हालत बिगड़ती जा रही है. विद्यासागर और प्रिंस नामक छात्र की हालत खराब होने की स्थिति में उन्हें पीएमसीएच में भर्ती कराया गया था. प्रिंस अस्पताल से लौटकर पुनः धरनास्थल पर डट गये हैं. वहीं विद्यासागर का ईलाज अस्पताल में चल रहा है. भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों में रजनीश, रवि, ओम प्रकाश की हालात लगातार बिगड़ती जा रही है. इन छात्रों को कभी भी अस्पताल में ईलाज कराने की आवश्यकता पड़ सकती है. इधर बुधवार तक चार छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया जा चुका है. छात्र नेता गौरव ने बताया कि संस्कार नामक छात्र की हालत काफी नाजुक है. उसे आईसीयू में भर्ती कराया गया है.

पटना विश्वविद्यालय के प्रोफेसर नवल किशोर चौधरी ने कहा कि कुलपति द्वारा छात्रों से बातचीत नहीं करना उनकी संवेदनहीनता का परिचायक है. उन्होंने इस घटना की निंदा करते हुये कहा कि आजादी के दिन छात्रों का भूख हड़ताल पर जमें रहना दुःखद घटना है.

भूख के कारण छात्रों की बिगड़ती स्थिति देख उनके साथी आक्रोशित हो रहे हैं. पिछले दो दिनों से छात्र अशोक राजपथ को दिन भर जाम कर रहे हैं. सड़क पर टायर जलाये जा रहे हैं. फिर भी इनकी सुध लेने अब तक कोई नहीं आया है. एआईएसएफ से जुड़े छात्र सुशील कुमार कहते हैं कि छात्रों ने जब आमरण अनशन करने फैसला किया तो कुलपति शंभुनाथ सिंह पटना छोड़कर गायब हो गये. 15 अगस्त के अवसर पर झंडोतोलन करने हेतु 14 अगस्त की शाम वे पटना लौटे. छात्रों का जत्था उनके आवास पर घंटों जमे रहे लेकिन छात्रों से बातचीत करना उन्होंने मुनासिब नहीं समझा. कुलपति 15 अगस्त को विश्वविद्यालय आये और झंडोतोलन कर चलते बने और छात्रों को भूखे मरने के लिये छोड़ दिया.

अन्ना हजारे और रामदेव के आंदोलनों से लेकर दुनिया भर के मुद्दों पर चिंता व्यक्त करने वाले राज्य के सुराज ब्रांड मुख्यमंत्री नीतिश कुमार भी इस मुद्दे पर मौन हैं. छात्र आंदोलन करके राजनीति में पहुंचे नीतिश कुमार की चुप्पी को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा है. भूख हड़ताल पर बैठे एआईएसएफ के राज्य सचिव विश्वजीत का कहना है कि छात्रों की संवेदना कहीं मौन न हो जाये, इसलिये हम भूखे ही अनशन पर बैठे रहेंगे.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

gaurav [] patna - 2012-08-29 15:32:02

 
  छात्रों पर फर्जी मुकदमा कर फंसाने वाले कुलपति का यह काम शर्मशार करने वाला है. 
   
 

batohi [globalhumanity2002@yahoo.co.in] patna - 2012-08-16 14:50:07

 
  कुलपति महोदय खुद को महान पत्रकार के रूप में पेश करते हें .जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय की वामपंथी धारा के आत्मघोषित पहरुए शम्भुनाथ सिंह ने पटना में वामपंथी छात्र संगठनो के संयुक्त मोर्चे की जिस तरह उपेक्षा की है और कामरेड छात्र नेताओं को लगातार फर्जी -मनगढ़ंत मुकदमों में फंसाने का जिस तरह का अभियान चलाया है, आप इन्हें दमननाथ सिंह कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी. आन्दोलन को तवज्जो देने के लिए रविवार परिवार को शुक्रिया . 
   
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