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अफवाह के बाद पूर्वोत्तर के लोगों का पलायन

अफवाह के बाद पूर्वोत्तर के लोगों का पलायन

बैंगलोर. 16 अगस्त 2012 बीबीसी

अफवाह


असम में पिछले दिनों फूटी जातीय हिंसा का असर दक्षिण भारत के बंगलौर और हैदराबाद शहरों में हुआ है. जहाँ बंगलौर में रह रहे उत्तर-पूर्वी राज्यों के हजारों लोग इस डर से शहर छोड़ कर भाग गए हैं कि कहीं उन पर हमला न हो जाए, वहीं हैदराबाद में असम और अन्य पूर्वोत्तर के राज्यों से आए लोगों के बीच भय व्याप्त है. बोडो जनजाति और बंगाली मुसलमानों के बीच व्यापक दंगे भड़क उठे थे जिनमें तीन लाख से ज़्यादा लोगों को अपने घर छोड़कर भागना पड़ा था.

हाल में असम में मुसलमानों के खिलाफ हुई हिंसा के विरोध में जब क्लिक करें मुंबई में मुसलमानों के संगठनों ने रोष प्रदर्शन किया तो वहाँ हिंसा हुई थी जिसमें दो लोग मारे गए थे और अनेक अन्य घायल हो गए थे.कुछ समय पहले महाराष्ट्र के पुणे शहर में हुए बम धमाकों के बाद भी ये कहा गया था कि इन बमों के जरिए उत्तर-पूर्वी राज्यों के लोगों को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी.

19 साल की रीमा अरुणाचल प्रदेश की रहने वाली हैं और बैंगलोर में मनोविज्ञान में बीए कर रही हैं. उनकी परीक्षाएँ चल रही हैं, लेकिन हिंसा के डर से वो बैंगलोर छोड़ कर जा रही हैं. रीमा ने कहा, “मुझे बहुत डर लग रहा है. पिछले दो दिनों से मैं घरों से बाहर नहीं निकली हूँ. मेरे दोस्तों ने कहा है कि घर से बाहर मत निकलना. ये अफवाह नहीं है.”

रीमा आगे कहती हैं, “मेरे दोस्त के भाई को उनके मकान मालिक ने घर से निकाल दिया. वो तीन चार दिन पहले वापस जा चुके हैं. मैं भी अपना सामान तैयार कर रही हूँ.” ये पूछे जाने पर कि वो अपनी परीक्षा बीच में छोड़कर क्यूँ जा रही हूँ, तो रीमा ने कहा, परीक्षाएँ जिंदगी से ज्यादा कीमती तो नहीं हैं ना. उन्होंने कहा, “उत्तर पूर्व के छात्र इतनी दूर से यहाँ पढ़ने आते हैं. और ये ज्यादातर छात्र किसान परिवार से आते हैं. लोग बड़ी तकलीफ से अपने बच्चों को यहाँ पढ़ाने के लिए भेजते हैं.”

रीमा को उनके एक दोस्त ने एसएमएस में लिखा था, “आप देर रात बाहर अकेले नहीं जाएँ, रात में किसी मुस्लिम इलाके से नहीं गुजरें." बैंगलोर के ही एक और छात्र रॉबिन ने बीबीसी को ऐसे कई एसएमएस भेजे जिनमें उत्तर-पूर्व भारत, भूटान से छात्रों के भागने की बात कही गई है. रॉबिन ने बताया कि लोगों को कथित ऐसी धमकियाँ मिली हैं कि 20 अगस्त ईद के बाद उत्तर-पूर्व के लोगों पर हमले होंगे, और उन्हें इसी का डर है, हालाँकि अधिकारी भरोसा दिला रहे हैं कि डरने की कोई बात नहीं है.

एक एसएमएस में ब्रिगेड रोड पर मणिपुर, नागालैंड और अरुणाचल पर छात्रों पर कथित हमले की बात कही गई है. इन एसएमएस में कितनी सच्चाई है, ये साफ नहीं है. उधऱ असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने लोगों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया है. उन्होंने कहा, “मुझे अभी एक संदेश मिला है जिसके मुताबिक सोनिया गाँधी सभी उत्तर-पूर्व राज्यों के मुख्यमंत्रियों से मिलेंगी.”

लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि कुछ जगह हिंसक घटनाएं हुई हैं और कुछ जगह अफवाहें फैलाकर पूर्वोत्तर के लोगों को डराया जा रहा है. बंगलौर में अधिकारियों ने कहा है कि मोबाइल संदेशों के जरिए अफवाहें फैलाई गईं कि उत्तर-पूर्वी राज्यों के लोगों पर हमले हो सकते हैं. इसके बाद ही दो विशेष रेलगाड़ियों के ज़रिए चार हजार लोग शहर छोड़ कर असम चले गए.

बंगलौर में स्वतंत्रता दिवस के दिन अचानक अफवाहें गर्म हो गईं कि उत्तर-पूर्वी राज्यों के लोगों को निशाना बनाया जा सकता है. इसके बाद शहर का मुख्य रेलवे स्टेशन शहर छोड़ने वालों की भीड़ से भर गया. हालत ये हो गई कि अधिकारियों को दो विशेष रेलगाड़ियों का इंतजाम करना पड़ा. बंगलौर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बीबीसी हिंदी सेवा को बताया कि 4000 लोग शहर छोड़कर चले गए हैं और इनमें से ज्यादातर छात्र हैं.

असम, नगालैंड, मिजोरम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और त्रिपुरा आदि राज्यों से बेहतर शिक्षा और रोजगार की तलाश में नौजवान लड़के लड़कियाँ दिल्ली, पुणे, बंगलौर, मुंबई जैसे भारत के अलग अलग शहरों में जाते हैं. सिर्फ बंगलौर शहर में उनकी जनसंख्या 2.5 लाख से ज्यादा है. कर्नाटक के मुख्यमंत्री जगदीश शेट्टर ने कहा है कि बंगलौर में रहने वाले उत्तर-पूर्वी भारत के लोगों को कोई खतरा नहीं है. राज्य के गृहमंत्री आर अशोक ने कहा है कि हिंसा की स्थिति पैदा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.


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