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मनमोहन का कोयला घोटाला 2जी से बड़ा

मनमोहन का कोयला घोटाला 2जी से बड़ा

नई दिल्ली. 17 अगस्त 2012

कोयला


संसद के उच्च सदन राज्यसभा में पेश कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने प्राइवेट कंपनियों को कौड़ियों के भाव कोयला खानों का आवंटन कर दिया, जिससे सरकारी खजाने को 1 .86 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. कोल ब्लॉक आवंटन के मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सीधे विपक्ष के निशाने पर हैं क्योंकि जिस समय ये घोटाला हुआ है, उस समय कोयला मंत्रालय मनमोहन सिंह के पास था.

कैग ने कोयला घोटाले पर कहा है कि सरकार द्वारा कोल ब्लॉकों की प्रतिस्पर्धी तरीके से नीलामी न कराने की वजह से प्राइवेट कंपनियों को 1 लाख 85 हजार 591 लाख करोड़ रुपये का फायदा हुआ और सरकार को इतने का ही नुकसान हुआ. कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने जिस तरह से कोल ब्लॉकों को बांटा है, अगर उसके बजाये इन कोल ब्लॉकों की नीलामी की जाती तो सरकार को लगभग 1.86 लाख करोड़ रुपये का ज्यादा राजस्व प्राप्त होता. कैग ने अपनी रिपोर्ट में सरकार द्वारा एस्सार, टाटा स्टील, टाटा पावर, भूषण स्टील, जिंदल स्टील ऐंड पावर, हिंडाल्को समेत 25 घरानों को लाभ पहुंचाने का आरोप लगाया है.

सरकार द्वारा कैग की रिपोर्ट को मनमाना ठहराये जाने की आशंका के मद्देनजर कैग ने भी अपनी रिपोर्ट में सावधानी बरती है. कैग ने अपनी रिपोर्ट को लेकर कहा है कि उसने अपना अनुमान कोल इंडिया की वर्ष 2010-11 के दौरान कोयला उत्पादन की औसत लागत और खुली खदान से कोयला बिक्री के औसत मूल्य के आधार पर तय किया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि कोयला ब्लॉक आवंटन के लिए प्रतिस्पर्धी बोलियां मंगाने के कई साल पहले लिए गए फैसले पर अमल कर लिया जाता तो कंपनियों को होने वाले इस अनुमानित वित्तीय लाभ का कुछ हिस्सा सरकारी खजाने में पहुंच सकता था.

इसी तरह कैग ने उड्डयन विभाग को लेकर भी टिप्पणी करते हुये कहा है कि दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे पर पर यात्रियों से डेवलपमेंट फीस वसूलने की इजाजत देकर जीएमआर के नेतृत्व वाली डायल को 3415.35 करोड़ का फायदा पहुंचाया गया, जो नीलामी का सरासर उल्लंघन है. कैग की रिपोर्ट के अनुसार डायल को 100 रुपये सालाना लीज पर जमीन उपलब्ध कराई गई और इससे वह 60 साल के दौरान 1 लाख 63 हजार 557 करोड़ रुपये कमा सकती है.