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कोई कोयला घोटाला नहीं हुआ है-श्रीप्रकाश

कोई कोयला घोटाला नहीं हुआ है-श्रीप्रकाश

नई दिल्ली. 18 अगस्त 2012

श्रीप्रकाश जायसवाल


मनमाने तरीके से कोयला खदानों के आवंटन से 1.86 लाख करोड़ रुपये के नुकसान के दावे को केंद्र सरकार ने गलत बताया है. कोयला ब्लाक आवंटन से संबंधित कैग की रिपोर्ट को खारिज करते हुये सरकार ने कहा है कि यह एक अनुमानों पर आधारित रिपोर्ट है. उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में सीबीआई की जांच करा रही है और जो भी इसमें दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई करने से सरकार पीछे नहीं हटेगी.

सरकार की ओर से दलील देते हुये कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि कोयला खदान के आवंटन के लिए जो प्रक्रिया अपनाई गई थी, वह पूरी तरह पारदर्शी थी और उससे बेहतर कोई विकल्प नहीं था. उन्होंने कहा कि केवल औसत के आधार किसी आंकड़े पर पहुंचने से वह सहमत नहीं है. श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि कैग ने जिन 57 ब्लाकों के आवंटन पर आपत्ति उठाई है उनमें से अभी सिर्फ एक ब्लाक ही चालू हो सका है. जब 56 ब्लाक में से कोयला निकालने का काम शुरू नहीं हुआ है तो कैसे उससे नुकसान फायदे का आकलन हो सकता है.

श्रीप्रकाश जायसवाल से जब यह पूछा गया कि कैग ने ही 1.76 लाख करोड़ के 2जी घोटाले का अनुमान लगाया था, वह सही साबित हुआ. ऐसे में कोयला घोटाले पर सवाल क्यों ? श्री प्रकाश जायसवाल ने कहा कि सरकार या कैग दोनों में दोषी कोई नहीं है. कैग का काम लेखा परीक्षण करना है जबकि सरकार का काम सवा अरब लोगों की जरूरतों के अनुरूप काम करना है.

कोयला मंत्री ने सरकार की नीति को सही ठहराते हुये तर्क दिया कि अगर यह प्रक्रिया नहीं अपनाई गई होती तो देश में न तो कोयले का उत्पादन बढ़ता न विकास की गति तेज होती और न ही देश की समस्याओं का निवारण हो सकता. उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्धा बोली के जरिए आवंटन का भाजपा शासित छत्तीसगढ़ और राजस्थान सरकार ने भी विरोध किया था. श्री जायसवाल ने कहा कि देश में कोयले की जरूरत बढ़ने पर 1993 में निजी क्षेत्र को ब्लाक आवंटन करने का फैसला किया गया. पहले छह वर्ष में सिर्फ आठ ब्लाक आवंटित किए गये लेकिन मांग बढ़ने पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक सरकार के पांच वर्ष में इससे चार गुना अधिक 35 ब्लाक आवंटित किए गए. उसके बाद पांच वर्ष में इसके चार गुना ब्लाक आवंटित किए गए.


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