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सभापति को मंत्री ने कैसे दिया आदेश?

सभापति को मंत्री ने कैसे दिया आदेश?

नई दिल्ली. 22 अगस्त 2012

राजीव शुक्ला


राज्य सभा का सभापति कहने को तो सदन का अध्यक्ष होता है लेकिन मंगलवार को राज्यसभा में जिस तरह से राज्य मंत्री राजीव शुक्ला ने अध्यक्ष की कुर्सी पर आसीन उप सभापति के पास जा कर उन्हें फुसफुसाने वाले स्वर में आदेश दिया, उसके बाद यह धारणा टूट गई है. आदेश भी ऐसा कि सभापति ने तुरंत उस पर पर अमल किया. इस घटना को लेकर विपक्षी पार्टी भाजपा ने कहा है कि इस घटना ने साबित कर दिया है कि कांग्रेस सदन में बहस नहीं चाहती.

मंगलवार को राज्यसभा की कार्रवाई शुरु होने के बाद जब कोयला खदान आवंटन घोटाले पर सीएजी की रिपोर्ट और प्रधानमंत्री की संलिप्तता को लेकर सदन में बहस चल रही थी, उस समय अध्यक्ष की कुर्सी पर उप सभापति पीजे कुरियन बैठे हुये थे. शोर-शराबा बढ़ा तो केंद्रीय संसदीय कार्य राज्य मंत्री राजीव शुक्ला उप सभापति की कुर्सी के पास जा पहुंचे.

कांग्रेस नेता पीजे कुरियन को मंगलवार को ही उपसभापति बनाया गया था, ऐसे में लगा कि राजीव शुक्ला संभवतः उन्हें बधाई देने जा रहे हैं लेकिन उप सभापति के पास जा कर राजीव शुक्ला ने उप सभापति को कान में कहा कि- 'शोरगुल होगा. कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थागित कर दीजिए.' इस पर उप सभापति ने कहा- 'अच्छा'. इसके बाद उप सभापति ने सदन की कार्रवाई स्थगित कर दी.

राजीव शुक्ला और उप सभापति पीजे कुरियन को यह अनुमान नहीं था कि वे दोनों जो बातचीत कर रहे हैं, उसे पूरा सदन सुन रहा है क्योंकि उप सभापति के सामने रखा माईक चालू है. यहां तक कि यह पूरा प्रसंद राज्यसभा टीवी के कैमरे पर भी कैद हुआ.

इस घटना से आवाक् रह गये सदन के सदस्यों ने जब हंगामा किया तब तक सदन की कार्रवाई स्थगित हो चुकी थी. बाद में राजीव शुक्ला ने इस मामले पर सफाई दी कि यदि विपक्ष सदन की कार्यवाही चलने में बाधा पहुंचाता है तो हमें अपनी बात रखने का हक है. हम अपनी राय रख सकते हैं, विपक्ष को अपनी बात कहने का हक है. लेकिन आखिरी फैसला सभापति के आसन पर बैठे शख्सह का होता है. वह चाहे तो हमारी सलाह मान सकता है या फिर खारिज कर सकता है.

इधर इस घटना से नाराज भाजपा ने सदन की इस परंपरा को शर्मनाक बताते हुये इसे लोकतंत्र के लिये खतरनाक कहा है. भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर का कहना है कि इस घटना से इस बात को और स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस पार्टी संसद की कार्रवाई में किस तरह से रुकावट डालती है. प्रकाश जावड़ेकर के अनुसार कोयला घोटाले में मनमोहन सिंह की संलिप्तता को लेकर कांग्रेस किसी भी तरह की बहस नहीं चाहती. उन्होंने कहा कि हम पूरे घटनाक्रम को गंभीरता से उठाएंगे.


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