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बैंकों में हड़ताल से फंसे अरबो रुपये

बैंकों में हड़ताल से फंसे अरबो रुपये

नई दिल्ली. 22 अगस्त 2012 बीबीसी

बैंक हड़ताल


पूरे भारत में सार्वजनिक क्षेत्रों के लगभग 10 लाख कर्मचारी बुधवार से दो दिनों की हड़ताल पर हैं, जिससे कारोबारी गतिविधियों के प्रभावित होने की संभावना है.

यह हड़ताल उन सुधारों के प्रस्ताव के खिलाफ है जिनसे बैंकिंग उद्योग में विदेशी और निजी पूंजी का आना आसान हो सकता है. समाचार एजेंसी रॉयटर्स का कहना है कि सभी कर्मचारी इस हड़ताल में हिस्सा नहीं लेंगे. पीटीआई ने कहा है कि हड़ताल से सरकारी बैंकों की 70 हजार से अधिक शाखाएं प्रभावित होंगी.

भारतीय स्टेट बैंक सहित 27 सरकारी बैंकों के अलावा कुछ निजी और विदेशी बैंक भी हड़ताल में शामिल होंगें. कर्मचारी संघ बैंकिंग कानून विधेयक में संशोधन के लिए सरकार की कोशिशों का विरोध कर रही हैं.

यूनियन के नेताओं का कहना है कि बैंकिंग नियमन अधिनियम 1949 और बैंकिंग कम्पनीज एक्वीजीशन एंड ट्रांसफर ऑफ अंडरटेकिंग्स अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव है. इसके अलावा विधेयक में बैंकों में निजी और विदेशी पूंजी को अनुमति देने और निजी कम्पनियों को नए बैंक शुरू करने के लिए लाइसेंस देने का प्रावधान है.

उनकी प्रमुख मांगें हैं कि नौकरियों की आउटसोर्सिग नहीं होनी चाहिए, ग्रामीण शाखाओं को बंद करने से रोका जाए और खंडेलवाल समिति की सिफारिशें एक तरफा लागू न की जाएँ. रॉयटर्स ने ऑल इंडिया बैंक इम्प्लाईज एसोसिएशन के सचिव विश्वास उटागी के हवाले से कहा, ''हड़ताल को स्थगित करने का कोई सवाल नहीं है जब तक वित्त मंत्री यह आश्वासन नहीं देते कि यह बिल पेश नहीं किया जाएगा.''

एक बैंक अधिकारी ने कहा है कि पैसे के लेन-देने पर असर नहीं होगा क्योंकि वो स्वाचालित एटीएम के जरिए जारी रहेगा. अधिकारी ने कहा कि इससे पहले की हड़तालों में भी इस पर असर नहीं हुआ था. इससे पहले पांच अगस्त को हुई हड़ताल में देश भर के बैंकों में कामकाज प्रभावित हुआ था.


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