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2 जी घोटाले में चिदंबरम को राहत

2 जी घोटाले में चिदंबरम को राहत

नई दिल्ली. 24 अगस्त 2012

पी चिदंबरम


उच्चतम न्यायालय ने वित्त मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता पी चिदंबरम को 2-जी स्पेक्ट्रम मामले में अभियुक्त बनाए जाने मांग को खारिज कर दिया है. जनता पार्टी प्रमुख सुब्रमण्यम स्वामी ने उन पर 2-जी स्पेक्ट्रम मामले में कई आरोप लगाए थे और कहा था कि उनके खिलाफ मामला चलाया जाए. इस मामले में सुनवाई करते हुये उच्चतम न्यायालय ने कहा कि चिदंबरम के खिलाफ ऐसे सबूत नहीं हैं कि उनके खिलाफ मामला चलाया जाये.

गौरतलब है कि पी चिदंबरम को टेलीकॉम घोटाले में सहआरोपी बनाने की सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका पटियाला हाउस कोर्ट में सीबीआई के स्पेशल जज ओ पी सैनी ने 4 फरवरी को खारिज कर दी थी. सुब्रह्मण्यम स्वामी ने तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम को भी 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में सह आरोपी बनाने के लिये अदालत में अर्जी लगाई थी. स्वामी का कहना था कि राजा ने जो कुछ किया, उसमें पी चिदंबरम की पूरी सहमति थी. टेलीकॉम घोटाले में सीबीआई की विशेष अदालत के जज ओ.पी. सैनी ने पी चिदंबरम को सह आरोपी बनाये जाने की याचिका को स्वीकार कर लिया था और अदालत ने सबसे पहले उनकी ही गवाही करवाई थी.

जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी ने आरोप लगाया था कि टेलीकॉम घोटाले में पी चिदंबरम के खिलाफ सारे सबूत हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को लिखे पत्र में भी सहमति जताई थी. जाहिर है, पी चिदंबरम पर आरोप का अर्थ ये भी था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की जानकारी में भी सारा घोटाला था. ऐसे में सुब्रह्मण्यम स्वामी के आरोप पूरी यूपीए सरकार को भी घेरे में खड़ी करने वाली थी.

2जी स्पेक्ट्रम मामले में जनता पार्टी के अध्यक्ष सुब्रह्मण्यम स्वामी ने हलफनामा दिया था कि 2 जी स्पेक्ट्रम मामले में ए राजा ने तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम की सहमति से ही सभी घोटालों को अंजाम दिया. स्वामी के अनुसार इसके लिये ए राजा और पी चिदंबरम के बीच कई दौर की बैठकें भी हुईं और इन्हीं बैठकों में स्पेक्ट्रम की कीमतें भी तय की गईं.

सुब्रह्मण्यम स्वामी ने इस पूरे मामले में राजा और चिदंबरम के बीच की बातचीत का ब्यौरा सौंपते हुये आरोप लगाया था कि पी चिदंबरम ने ही बतौर वित्तमंत्री 2जी स्पेक्ट्रम की नीलामी के लिये पहले आओ, पहले पाओ की नीति को मंजूरी दी थी. यहां तक कि ए राजा ने जब 2001 की निर्धारित दर पर 2जी स्पेक्ट्रम को मंजूरी देने की बात की तो वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने विरोध किया और फिर जब राजा ने 2007 की दर पेश की तो उसे चिदंबरम ने तत्काल अपनी सहमति दे दी. इस मामले को सुब्रह्मण्यम स्वामी उच्चतम न्यायालय ले गये थे, जहां उनके तर्कों से असहमति जताते हुये न्यायालय ने चिदंबरम को राहत दे दी.


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