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ए के हंगल नहीं रहे

ए के हंगल नहीं रहे

मुंबई. 26 अगस्त 2012 बीबीसी

ए के हंगल


हिंदी फिल्मों के मशहूर चरित्र अभिनेता एके हंगल का रविवार सुबह मुंबई में निधन हो गया. अवतार किशन हंगल उर्फ एके हंगल 98 वर्ष के थे. उनका जन्म साल 1917 में हुआ और अपना ज़्यादातर बचपन उन्होंने पेशावर में बिताया. मार्क्सवादी विचारधारा के एके हंगल भारत के स्वतंत्रता संग्राम से भी जुड़े रहे और राजनीतिक पार्टियों से उनका वास्ता रहा. पिछले साल उन्होंने एक बार फिर सीपीआई की सदस्यता को स्वीकार किया था.

कुछ दिन पहले बाथरुम में गिर जाने के कारण उनके कूल्हे की हड्डी टूट गई थी जिसके बाद उन्हें 16 अगस्त को मुंबई के आशा पारेख अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

इलाज के दौरान उनकी हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटीलेटर पर रखा गया था. उनका एक फेफड़ा काम नहीं कर रहा जिसके चलते उन्हें सांस लेने में भी परेशानी हो रही थी. लंबी बीमारी और पैसे की तंगी के चलते अपना इलाज कराने के लिए कुछ समय उन्होंने क्लिक करें बॉलीवुड से मदद की अपील की थी. जिसके बाद उनकी आर्थिक मदद के लिए एक फैशन शो आयोजित किया गया था.

एके हंगल ने बीते ज़माने की 200 से अधिक फिल्मों में काम किया है. शोले फिल्म के मशहूर संवाद 'इतना सन्नाटा क्यों है भाई' को उन्होंने डायलॉग अदायगी के इतिहास में अमर कर दिया. हिंदी सिनेमा में उनकी यादगार चरित्र भूमिकाओं के लिए उन्हें पद्मभूषण से भी नवाज़ा गया.

एक समय था जब शायद ही कोई फिल्म उनकी मौजूदगी के बिना बनाई जाती हो. नमक हराम, शोले, शौकीन, आइना, बावर्ची उनकी सर्वश्रेष्ठ फिल्मों में से हैं. 1940 के दशक उन्होंने इप्टा में रहते हुए खासा काम किया और इस दौरान बलराज साहनी और कैफ़ी आज़मी से जुड़े. 98 साल की उम्र में भी वो स्क्रीन से रिटायर नहीं हुए थे. सात साल के लंबे ब्रेक के बाद हाल ही में उन्होंने मनोरंजन चैनल कलर्स पर आने धारावाहिक 'मधुबाला' के ज़रिए वापसी की.


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