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सीआरआर यथावत बना रहेगा: रिजर्व बैंक

सीआरआर यथावत बना रहेगा: रिजर्व बैंक

कांचीपुरम. 28 अगस्त 2012

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भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर के सी चक्रवर्ती ने भारतीय स्टेट बैंक प्रमुख के चेयरमैन प्रतीप चौधरी को उनकी नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) संबंधित टिप्पणी के लिए आड़े हाथों लिया. ग्रेटर लेक्स इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की सालाना गोष्ठी को संबोधित करते हुए च्रकवर्ती ने कहा कि चौधरी यदि केंद्रीय बैंक के नियामकीय माहौल में काम नहीं कर सकते तो अपने लिए कोई और जगह तलाश कर लें. उन्होंने कहा कि आरबीआई नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) को खत्म करने के बारे में सोच भी नहीं सकता और बैंको को मौजूदा वातावरण में ही काम करना होगा.

उल्लेखनीय है कि कुछ दिनों पहले भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन प्रतीप चौधरी ने कहा था कि नगद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) की वजह से बैंकों को 21 हजार करोड़ रुपये की भारी भरकम राशि का बोझ उठाना पड़ रहा है. इससे किसी का भला नहीं हो रहा अतः इसे खत्म किया जाना चाहिए. दरअसल सीआरआर बैंकिंग जमाओं का वह हिस्सा होता है जो वाणिज्यिक बैंकों को केंद्रीय बैंक के पास जमा रखना पड़ता है. इस समय सीआरआर 4.75 प्रतिशत है. रिजर्व बैंक इस जमा पर उन्हें कोई ब्याज नहीं देता जबकि बैंको को अपने जमाकर्ताओं को इस राशि पर ब्याज देना पड़ता है जिससे उनकी लागत बढ़ती है.

संस्थान के एक अन्य छात्र के सवाल कि किस बैंक को संरक्षण की जरूरत है पर च्रकवर्ती ने कहा, निश्चित रूप से भारतीय स्टेट बैंक. यह बहुत बड़ा पेड़ है और अगर आप इस पेड़ का बचाव नहीं कर पाते तो यह (आग) दूसरे बैंकों तक फैलेगी और प्रणालीगत विफलता हो सकती है.