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कर्नाटक: लौह अयस्क खनन पर लगा प्रतिबंध हटा

कर्नाटक: लौह अयस्क खनन पर लगा प्रतिबंध हटा

नई दिल्ली. 3 सितंबर 2012

उच्चतम न्यायालय


उच्चतम न्यायालय ने कर्नाटक की उन निजी कंपनियों के लौह खनन अयस्क कार्य पर से आंशिक तौर पर प्रतिबंध हटा दिया है जिन्होंने पट्टे की शर्तों का उल्लंघन नहीं किया था. अब राज्य में होने वाले लौह अयस्क खनन कार्य पर से अदालत का प्रतिबंध समाप्त हो गया है.

न्यायमूर्ति आफताब आलम की अध्यक्षता वाली पीठ ने केंद्रीय अधिकारप्राप्त समिति (सीईसी) उस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया जिसमें सीईसी ने सिफारिश की थी कि वर्ग `अ' के तहत पट्टाधारकों को खनन जारी रखने की अनुमति दी जाए क्योंकि उन्होंने किसी नियम का उल्लंघन नहीं किया.

पीठ ने अपना निर्णय सुनाते हुए कहा है कि इस वर्ग की कंपनियों को कुछ शर्तों के साथ खनन परिचालन जारी रखने की अनुमति दी जा रही है लेकिन बाकी पट्टों के संबंध में लौह अयस्क के खनन पर रोक जारी रहेगी. इस वर्ग में कुल 45 पट्टें हैं जिनमें से 21 पर काम चल रहा है लेकिन बाकी 24 पर अभी खनन कार्य शुरु नहीं हुआ है.

गौरतलब है कि सीईसी ने अपनी रिपोर्ट में खानों को तीन वर्गों- अ, ब और स में बांटा था. वे खानें जहां सबसे कम या कोई अनियमितताएं नहीं पाई गईं, उन्हें वर्ग ‘अ’ के तहत रखा गया है और जहां सबसे अधिक अनियमितताएं पाई गईं उन्हें ‘स’ वर्ग में रखा गया है.