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दफ्तर में यौन अपराध पर कानून सख्त

दफ्तर में यौन अपराध पर कानून सख्त

नई दिल्ली. 4 सितंबर 2012

यौन अपराध


कार्यस्थलों पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकने के लिये तैयार किये गये विधेयक को लोकसभा से मंजूरी मिलने के बाद उम्मीद की जा रही है कि इस तरह की घटनाओं में कमी आएगी. हालांकि इस विधेयक के कुछ प्रावधान पहले से भी लागू थे लेकिन उन प्रावधानों में सख्ती की कमी के कारण महिला संगठनों के दबाव में यह विधेयक लाया गया.

कार्यस्थलों पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और सुधार) अधिनियम 2010 जब पेश किया गया, उस समय संसद में कोयला ब्लॉक आवंटन घोटाले को लेकर हंगामा चल रहा था. इस कारण इस विधेयक को बिना किसी चर्चा और बहस के ही पारित कर दिया गया. महिला और बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ ने जब विधेयक पेश किया तब भी सदन में हंगामा चल रहा था. इसके बाद सदन में इसे बिना चर्चा के पारित मान लिया गया.

कार्यस्थलों पर यौन प्रताड़ना में निजी और सरकारी दोनों तरह के कार्यालय शामिल किये गये हैं. इसके अलावा घरेलू काम करने वाली स्त्रियों को भी इस विधेयक में शामिल किया गया है. अभी तक केवल संगठित क्षेत्र की महिलाओं को इस दायरे में रखा गया था लेकिन अब इस कानून में असंगठित क्षेत्र के अलावा घरेलू काम करने वाली महिलाओं को भी शामिल किया गया है. इस दायरे में घरेलू काम करने वाली महिलाओं और नौकरानियों को शामिल होने से महिलाओं का एक बड़ा दायरा इस कानून की छत के नीचे महफूज रह सकेगा.

कार्यस्थलों पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न के दायरे में किसी भी तरह के अवांछित शारीरिक, मौखिक या गैर मौखिक यौन व्यवहार को भी यौन उत्पीड़न के दायरे में रखा गया है. शारीरिक संपर्क, शारीरिक संबंध बनाने की मांग या आग्रह या अश्लील टिप्पणियां करना या अश्लील सामग्री दिखाने को यौन उत्पीड़न माना जाएगा.


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