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आतंकवाद और सांप्रदायिकता की राजनीति खतरनाक

आतंकवाद और सांप्रदायिकता की राजनीति खतरनाक

नई दिल्ली. 13 अप्रैल 2009

 

इस्लामिक विषयों के जानकार और सेंटर फॉर स्टडी ऑफ सोसाइटी एंड सेक्‍युलरिज्‍म के चेयरमैन असगर अली इंजीनियर, सुप्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडेय और लखनऊ लोकसभा से लोक राजनीति मंच के उम्मीदवार एस.आर दारापुरी ने एक बयान जारी करते हुए दावा किया है कि यदि देश में बाबरी मस्जिद का ध्वंस न होता तथा 1998 का परमाणु परीक्षण न होता तो आज देश के सामने आतंकवाद इतनी बड़ी समस्या के रूप में मुंह बाए न खड़ी होती.

बयान में कहा गया है कि पहली बम विस्फोट की घटनाएँ 1993 में बाबरी मस्जिद के गिरने के बाद मुंबई में हुईं. परमाणु परीक्षण के बाद भारतीय जनता पार्टी नेतृत्व वाली सरकार की नीतियाँ अमरीका परस्त हो गयीं तथा 2001 में अमरीका के आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध में शामिल होने के बाद देश में पहली 'आतंकवादी' कही जाने वाली दुर्घटना संसद पर हमले के रूप में हुई. इसके बाद तो जैसे आतंकवादी घटनाओं की बाढ़ जैसी आ गई और पिछले नवम्बर में तो आतंकवादियों ने मुंबई जैसे हमले का दुस्साहस किया.

देश के जाने माने इन बुद्धिजीवियों ने अपने बयान में कहा है कि देश में सांप्रदायिक राजनीति की वजह से नफरत-हिंसा बढ़ी है तथा देश की संप्रभुता को भी खतरा खड़ा हो गया है. सांप्रदायिक राजनीति ही आतंकवादी घटनाओं के लिए जिम्मेदार है. इसमें जितने दोषी पाकिस्तान समर्थित कट्टरपंथी इस्लामी संगठन हैं उतना ही दोष राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ एवं अन्य हिन्दुत्ववादी संगठनों का है.

पाकिस्तान के ताज़ा हालात पर टिप्पणी करते हुए इस बयान में कहा गया है कि देश के लिए तालिबान का खतरा भी सीधे-सीधे है, जो धीरे-धीरे पाकिस्तान को निगल रहा है. किसी देश में कट्टरपंथी तत्वों को छूट देने का परिणाम क्या हो सकता है इसका सबक हमको पाकिस्तान से सीखना चाहिए.

असगर अली इंजीनियर, संदीप पांडेय और एस.आर दारापुरी ने अपने बयान में कहा है कि जब तक पाकिस्तानी निर्वाचित सरकार इतनी मजबूत नहीं होती कि वह अपनी सेना, खुफिया संस्था एवं आतंकवादी तत्वों पर काबू नहीं पाती तब तक सीमा पार से आतंकवाद का खतरा बना रहेगा.

इन तीनों बुद्धिजीवियों ने कांग्रेस द्वारा जगदीश टाईलर तथा सज्जन कुमार के टिकट काटे जाने का स्वागत करते हुए साफ किया है कि भाजपा को भी ऐसी कार्रवाई करनी चाहिए. बयान में कहा गया है कि इस देश में हिन्दुत्ववादी संगठनों को राजनीति में भाग लेने से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए. जो भी संगठन ऐसी संकीर्ण विचारधारा को मानता हो जो किसी दूसरे समुदाय से नफरत के आधार पर खड़ी हो, उसकी लोकतंत्र में कोई जगह नहीं होनी चाहिए.


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