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लादेन चाहिये था जिंदा

लादेन चाहिये था जिंदा

वॉशिंगटन. 6 सितंबर 2012

ओसामा बिन लादेन


अमरीका की इच्छा थी कि वह ओसामा बिन लादेन को ज़िंदा पकड़े. इसके लिये बजाप्ता निर्देश भी दिये गये थे लेकिन उतावले सैनिकों ने सारे निर्देश किनारे करते हुये, ओसामा को गोलियों से भून दिया. पाकिस्तान के ऐबटाबाद में जब अमरीकन सील कमांडो दस्ते ने कार्रवाई की तो वे लादेन को पाकर बदहवास हो गये. झूठ को सच और सच को झूठ की तरह पेश करने वाले अमरीकन सरकार की सील कमांडो दस्ते के सदस्य मैट बिसोनेट ने यह ताजा दावा किया है.

गौरतलब है कि 2 मई को पाकिस्तान के ऐबाटाबाद में अल कायदा के संस्थापक ओसामा बिन लादेन को अमरीकन सेना ने मार डालने का दावा किया था. बाद में अमरीकियों ने ओसामा बिन लादेन की लाश को भी किसी अनजानी जगह पर दफन करने की बात कही थी. जिस समय ओसामा को मारा गया था, तब अमरीकन सैनिकों ने कहा था कि लादेन ने जवाबी कार्रवाई की कोशिश की थी लेकिन बाद में अमरीकनों ने ही कहा कि लादेन पर जिस समय हमला बोला गया, उस समय लादेन निहत्था था.

अब मैट बिसोनेट नामक सैनिक ने मार्क ओवन नामक छद्म नाम से नो ईजी डे-द फर्स्टहैंड अकाउंट ऑफ द मिशन दैट किल्ड ओसामा बिन लादेन नामक किताब में दावा किया है कि सील कमांडो को यह कहा गया था कि यथासंभव ओसामा बिन लादेन को जिंदा पकड़ा जाये. मैट ने एक टीवी साक्षात्कार में कहा कि निश्चित तौर पर ऐसे निर्देश नहीं मिले थे कि ओसामा को मार ही डालना है, इसके उलट सील कमांडो को यह निर्देश दिया गया था कि अगर संभव हो तो ओसामा बिन लादेन को ज़िंदा पकड़ लिया जाये. लेकिन ऐसा नहीं हो सका.

इससे पहले दि वॉल स्ट्रीट जर्नल और द वॉशिंगटन पोस्ट के पूर्व संवाददाता रिच मिनिटर ने अपनी नई किताब ‘लीडिंग फ्रॉम बिहाइंड द रिलक्टेंट प्रेसिडेंट एंड द एडवाइजर्स हू डिसाइड फॉर हिम’ में कहा था कि अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने लादेन को मार गिराने का निर्णायक आदेश देने से पहले तीन बार ऐसा आदेश देने से इंकार कर दिया था. जनवरी, फरवरी और मार्च 2011 में लादेन को मारने के मिशन को ओबामा ने अनुमति नहीं दी. लेकिन बाद में हिलेरी क्लिंटन ने ओबामा को समझाया तब कहीं जा कर ओबामा लादेन को मारने के मिशन के लिये तैयार हुये. इस किताब में कहा गया है कि लादेन का पता लगाने में पाकिस्तान की संभवत: खुफिया एजेंसी आईएसआई के एक कर्नल ने उस वक्त बड़ी मदद की जब वह अगस्त 2010 में सीआईए के इस्लामाबाद स्टेशन में गया था. ऐसा संभव है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख को लादेन के खात्मे के लिए शुरू किए गए अभियान से तकरीबन पांच महीने पहले दिसंबर 2010 में ही इसके बारे में बता दिया गया हो.