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पत्नी की पिटाई के पक्ष में जज साहब

पत्नी की पिटाई के पक्ष में जज साहब

बंगलुरु. 7 सितंबर 2012

पत्नी


पत्नी की पिटाई को जायज ठहराने वाले कर्नाटक उच्च न्यायालय के जज के. भक्तवत्सल को उनके पद से हटाने की मांग तेज हो गई है. फेसबुक पर भी इस जज के खिलाफ मुहिम शुरु हो गई है. इधर महिला संगठनों के विरोध के बाद अब एक ऑनलाइन याचिका में उच्चतम न्यायालय के जस्टिस एस एच कपाड़िया से मांग की गई है कि महिला विरोधी मानसिकता वाले जस्टिस के. भक्तवत्सल को उनके पद से हटाया जाये. इससे पहले इसी जज के भक्तवत्सल ने टिप्पणी की थी कि जिस वकील की शादी नहीं हुई हो, उसे तलाक के मामले में बहस करने का अधिकार नहीं है.

गौरतलब है कि पिछले सप्ताह घरेलू हिंसा से संबंधित एक मामले की सुनवाई करते हुये जस्टिस के भक्तवत्सल ने पीड़ित महिला के खिलाफ टिप्पणी करते हुये कहा था कि यदि कोई व्यक्ति अपनी पत्नी की सही देखभाल करता है तो हिंसा में कोई बुराई नहीं है. जज का तर्क था कि किसी महिला की शादी में बहुत सारी परेशानियां उठानी पड़ती हैं. इसके अलावा पति उसकी देखभाल भी करता है. ऐसे में घरेलू हिंसा कोई मुद्दा नहीं होना चाहिये.

टाइम्स ग्रूप के अखबार बेंगलुरु मिरर के अनुसार घरेलू हिंसा को आधार बना कर तलाक मांग रही महिला को लेकर जज के भक्तवत्सल ने कहा कि जीवन में अक्सर ऐसे पड़ाव आते हैं. तुम्हारे दो बच्चे हैं और जानती हो एक महिला के सामने कितनी परेशानियां आती हैं. पिछले दिनों के दंपती ने अपने बच्चे के भविष्य के लिए समझौता कर लिया. तुम्हारा पति तो अच्छा कारोबार करता है. साथ में तुम्हारी अच्छी तरह देखभाल करता है. ऐसे में क्या हर्ज है अगर थोड़ी बहुत नोंकझोंक होती है तो. इसके अलावा जज ने यह भी कहा कि शादी शादी कोई ट्रांसपोर्ट सिस्टम नहीं है.

अब जस्टिस के भक्तवत्सल के खिलाफ एक मुहिम शुरु हो गई है. उनकी टिप्पणियों को महिला विरोधी बताते हुये उन्हें पद से हटाने की मांग की जा रही है. वकीलों ने भी जज के बयान को लापरवाह बयान बताया है. इधर सोशल साइट्स के अलावा एक ऑनलाइन याचिका दायर करके भी जज के बयान के आधार पर उन्हें पद से हटाने की मांग की गई है.