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नहीं रहे डॉ. वर्गीज़ कुरियन

नहीं रहे डॉ. वर्गीज़ कुरियन

नाडियाड. 9 सितंबर 2012

डॉ. वर्गीज़ कुरियन


भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादक देश बनाने में महती भूमिका निभाने वाले डॉ. वर्गीज़ कुरियन का गुजरात के नाडियाड में निधन हो गया. वे 90 वर्ष के थे. श्वेत क्रांति के जनक वर्गीज़ कुरियन ने वर्ष 1973 में गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फ़ेडरेशन (जीसीएमएमएफ़) की स्थापना की और 34 साल तक इसके अध्यक्ष रहे. जीसीएमएमएफ़ ही वह संस्था है जो अमूल के नाम से डेयरी उत्पाद बनाती है.

वर्गीज़ कुरियन का जन्म वर्ष 1921 में केरल के कालीकट में हुआ. उन्होंने पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में आगे की पढ़ाई करने के लिए वह अमेरिका चले गए. भारत लौटने के बाद डॉ. कुरियन ने गुजरात के आणंद शहर में सहकारी डेयरी विकास के कामयाब मॉडल की स्थापना की. डॉ. कुरियन के जमीनी स्तर पर प्रयासों से ही आणंद को विश्व स्तर पर पहचान मिली और भारत दुनिया में सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बना.

वर्ष 1973 में डॉ. वर्गीज़ कुरियन द्वारा स्थापित जीसीएमएमएफ़ सहकारी संस्था के आज 11 हज़ार से अधिक गाँवों में 20 लाख से अधिक किसान सदस्य है, जो उसे देश की सबसे बड़ी सहकारी संस्था बनाते हैं. इस संस्था ने सहकारिता के क्षेत्र में दूध और अन्य उत्पादों के लिए नया इतिहास रचा.

कुरियन को भारत सरकार द्वारा पद्मविभूषण, पद्म श्री, पद्म भूषण जैसे कई महत्वपूर्ण पुरस्कारों से नवाज़ा था. इसके अलावा उन्हें रमन मैग्सेसे अवार्ड और वर्ल्ड फूड अवार्ड जैसे सम्मानित पुरस्कार भी मिले थे. डॉ. वर्गीस कुरियन आणंद के इंस्टिट्यूट ऑफ़ रुरल मैनेजमेंट (आईआरएमए) के अध्यक्ष भी रहे हैं.


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