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बिड़ला-टाटा का इंजन हमारे खून से

बिड़ला-टाटा का इंजन हमारे खून से

मुंबई. 13 सितंबर 2012

चक्रव्यूह


'बिड़ला हो या टाटा, अंबानी हो या बाटा, सबने अपने चक्कर में देश को है बांटा, अरे हमारे ही खून से इनका इंजन चले धकाधक, आम आदमी की जेब हो गई है सफाचट. जी हां, प्रकाश झा की फिल्म चक्रव्यूह में यही गाना है, जिसे लेकर इन दिनों चर्चा है. इस गाने को पहले तो सेंसर बोर्ड ने मना कर दिया लेकिन बाद में मामला तर्कों तक पहुंचा तो गाने को सेंसर बोर्ड ने हरी झंडी दिखा दी.

नक्सल आंदोलन को केंद्र में रख कर बनाई गई प्रकाश झा की फिल्म चक्रव्यूह 24 अक्टूबर को रिलीज होने वाली है लेकिन जब फिल्म सेंसर बोर्ड के पास गई तो सेंसर बोर्ड ने टाटा-बिड़ला वाले गीत पर आपत्ति दर्ज करा दी. कहा गया कि इस गाने से टाटा-बिड़ला का नाम हटाया जाये. तर्क दिया गया कि ये नाम दो प्रमुख औद्योगिक घरानों के हैं और अगर आप इन्हें हमारे ही खून से इनका इंजन चले धकाधक जैसी पंक्तियों से नवाजेंगे तो बवाल मच सकता है.

बाद में फिल्म को सेंसर बोर्ड की दूसरी कमेटियों के पास ले जाया गया. वहां भी प्रकाश झा को समझाने की कोशिश की गई लेकिन अंततः प्रकाश झा ने कहा कि इस गाने में इन दो नामों को केवल प्रतीकात्मक तौर पर इस्तेमाल किया गया है, तब कहीं जा कर सेंसर बोर्ड ने इस निर्देश के साथ गाने को हरी झंडी दिखाई कि वे इस गाने को लेकर एक घोषणा करेंगे कि इस गाने का उद्देश्य किसी की भावनाओं को आहत करना नहीं है.