पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >दिल्ली Print | Share This  

अरविंद की राजनीति से दूर रहेंगे अन्ना

अरविंद की राजनीति से दूर रहेंगे अन्ना

नई दिल्ली. 17 सितंबर 2012

अन्ना हजारे


अन्ना हजारे ने एक बार फिर कहा है कि वे चुनाव नहीं लड़ेंगे. उनका कहना है कि मैं ना चुनाव लडूंगा, ना पक्ष या पार्टी निकालूँगा, लेकिन जनता को विकल्प देने का प्रयास करूँगा. अन्ना के इस बयान के बाद अनुमान लगाया जा रहा है कि वे अरविंद केजरीवाल के राजनीतिक अभियान से अभी भी दूरी बनाये रखने के पक्ष में हैं

अपने एक नये लेख में अन्ना हजारे ने कहा है कि देश के हर राज्य से हर दिन जो मेरे पास रालेगनसिद्धि में बड़े पैमाने पर जनता आ रही है, कह रही है कि देश वासियों को विकल्प दो, उस पर से मुझे विश्वास होने लगा है कि आजादी के 65 साल के बाद अब परिवर्तन का समय आ चुका है. जरूरत है तो सिर्फ लोकशिक्षा और लोकजागृति की. उसके लिए आन्दोलन में जुड़ कर गाँव गाँव में जा कर युवकों ने जनता को जगाना है.

अन्ना हजारे ने लिखा है कि हमें कई सांसद कह रहे थे कि चुनाव लड़ कर संसद में आओ अब उनका सपना भी तो जनता ने पूरा करना है. देश के चारित्र्यशील उम्मीदवारों को जनता ने संसद में भेजना है और दिखाना है कि जन लोकपाल, राईट टू रिजेक्ट, जनता की सनद, ग्रामसभा जैसे कानून कैसे बनाते हैं और भ्रष्टाचार मुक्त भारत का निर्माण कैसे हो सकता है.

एफडीआई के मुद्दे पर अन्ना हजारे ने लिखा है कि एफ डी आई से सही मायने में अर्थनीति नहीं बदलेगी. जब तक भ्रष्टाचार को रोकने के सख्त कानून नहीं बनते तब तक देश की अर्थनीति नहीं बदलेगी. साथ ही साथ महात्मा गांधीजी का कहा भी याद करना होगा कि देश की अर्थनीति बदलना है तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था बदलनी होगी.

अन्ना के अनुसार एफ डी आई आ गया तो देश की अर्थनीति बदलेगी ऐसे सत्ताधारी और कई पक्ष कह रहे हैं. विरोधी कह रहे हैं कि देश के लिए खतरा है. सभी 2014 का चुनाव को सामने रख कर एक दूसरों के मत काटने की कोशिश कर रहे हैं. मेरे जैसे पक्ष और पार्टी से बाहर रहने वाले लोगों को लगता है कि एफ डी आई के बहाने विदेश से आने वाला पैसा हमारे ही देश का (काला) पैसा नहीं होगा ऐसे कैसे कह सकते हैं. हमारे देश का पैसा घूम फिर कर रूप बदल कर हमारे ही देश में फिर से आता होगा ऐसे अगर जनता में संदेह हो तो क्या गलत है?

अन्ना हजारे ने आह्वान किया है कि भ्रष्टाचार मुक्त भारत के लिए आज तक सरकार के विरोध में आन्दोलन चला था, अब सरकार के विरोध में आन्दोलन ना चलाते हुए संसद में जो सांसद बैठे हैं, उनको बदलने का जनआन्दोलन चलाना होगा. जिन लोगों ने जन लोकपाल को विरोध किया था ऐसे लोगों को 2014 के चुनाव में अपना मत नहीं देना है.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in