पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >समाज Print | Share This  

फिर छपी केट की टॉपलेस तस्वीर

फिर छपी केट की टॉपलेस तस्वीर

कोपेनहेगन. 21 सितंबर 2012

केट मिडिलटन


अखबारों द्वारा ब्रिटेन के शाही परिवार की बहु केट मिडिलटन की टॉपलेस फोटो छापने का शर्मशार करने वाला सिलसिला लगातार जारी है. शाही परिवार की तमाम कोशिशें नाकामयाब साबित हुई हैं और कानूनी नोटिसों के बाद भी पत्रकारिता को शर्मशार करने वाली हरकत जारी है. केट की तस्वीर अब स्वीडन के बाद डेनमार्क के अखबार ने प्रकाशित की है.

गौरतलब है कि एक फ्रांसीसी पत्रिका क्लोजर ने ब्रिटेन की महारानी की बहू डचेज ऑफ कैंब्रिज केट की टॉपलेस तस्वीरें प्रकाशित की थी. क्लोजर ने ये तस्वीरें उस वक्त लीं जब ड्यूक और डचेज पिछले हफ्ते रानी के भतीजे लॉर्ड लिनले के फ्रांसीसी महल में छुट्टियां मना रहे थे. इसके बाद प्रिंस ऑफ़ वेल्स के कार्यालय क्लेयरेंस हाउस के एक प्रवक्ता ने कहा कि ड्यूक और डचेज ऑफ़ यह जानकर काफ़ी दुखी हैं कि एक फ्रांसीसी प्रकाशन और एक फोटोग्राफर ने उनकी निजता का उल्लंघन किया. जो काफ़ी अनुचित है. इसके बाद शाही परिवार ने ऐसी तस्वीर छापने वाली पत्रिकाओं को कानूनी नोटिस भी जारी किया. लेकिन इन नोटिसों से बेपरवाह अखबारों द्वारा केट की टॉपलेस तस्वीरों का प्रकाशन जारी है.

अब कोपेनहेगन की एक पत्रिका सी ओग होअर ने इन 36 तस्वीरों का प्रकाशन किया है. यह प्रकाशन ऐसे वक्त में हुआ है, जब एक दिन पहले इसी पत्रिका के सहयोगी संस्थान ने स्वीडन में अपने प्रकाशन में इन तस्वीरों को जगह दी थी. कोपेनहेगन की इस पत्रिका के प्रधान संपादक ने अपने तरीके से पत्रकारिता की परिभाषा गढ़ते हुये तर्क दिया है कि हमारे पाठक शाही परिवार के बारे में चटपटी खबरें पढ़ना चाहते हैं. पूरी दुनिया इन फोटो के बारे में बात कर रही है, लेकिन वास्तव में बहुत कम लोगों ने इसे देखा है. ऐसे में इस तस्वीर का प्रकाशन हमें जरुरी लगा.

फ्रांस के जिस अखबार क्लोजर ने सबसे पहले इन तस्वीरों का प्रकाशन किया था, जहां पुलिस ने छापेमारी करके इन तस्वीरों का स्रोत तलाशने की कोशिश की है. हालांकि फ्रांस के अखबारों ने सरकार की इस कोशिश का विरोध करते हुये कहा है कि तस्वीरों का प्रकाशन अगर पत्रकारिता के मानदंड के अनुसार अनैतिक है तो इनके लिये जिस तरह से छापेमारी की कार्रवाई की जा रही है, उसे भी नैतिक नहीं कहा जा सकता.


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in