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जंगल बचाने पेड़ पर डेरा

जंगल बचाने पेड़ पर डेरा

चंद्रपुर. 22 सितंबर 2012

ब्रिकेश सिंह


ग्रीनपीस इंडिया के अभियानकर्ता ब्रिकेश सिंह इन दिनों महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में एक पेड़ पर डेरा डाले बैठे हैं. ब्रिकेश ने मध्य भारत के जंगलों में कोयला खनन के विरोध का यह अनूठा तरीका निकाला है. इस महीने की पहली तारीख को इस पेड़ पर चढ़ने के बाद ब्रिकेश पूरा एक महीना यहीं पेड़ पर रहकर बिताएंगे.

जिस पेड़ पर ब्रिकेश अपना घर बनाकर रह रहे हैं, वह तडोबा-अंधारी बाघ संरक्षण क्षेत्र के बफर जोन में स्थित है. ग्रीनपीस का कहना है कि यह पेड़ इस बात का प्रतीक है कि इन हरे-भरे जंगलों का विनाश अब दूर नहीं है. इस पेड़ के एक तरफ कोयला पावर प्लांट दिखता है तो दूसरी तरफ इस अभ्यारण के खूबसूरत जंगल. इस पेड़ के नीचे ढेर सारा कोयला छुपा हुआ है. फिलहाल यह खनन गतिविधियों से दूर है. अगर यहां खनन शुरु हुआ तो यहां के हरे-भरे क्षेत्र, वन्य जीवों और इन जंगलों पर अपनी आजीविका के लिए निर्भर समुदाय को गंभीर नुकसान उठाना पड़ेगा.

मध्य भारत के जंगलों को खनन से बचाने के लिए ग्रीनपीस इंडिया बहुत बड़े स्तर पर ऑनलाईन हस्ताक्षर अभियान चला रहा है. ‘जंगलिस्तान बचाओ’ नाम के इस अभियान के लिए अभी तक 80,000 से ज्यादा लोग हस्ताक्षर कर अपना समर्थन दे चुके हैं. मगर संगठन का लक्ष्य अक्टूबर तक 100,000 हस्ताक्षर इक्ट्ठा करना है.

ब्रिकेश सिंह भारत सरकार द्वारा अक्टूबर में आयोजित संयुक्त राष्ट्र जैव विविधता सम्मेलन में कोयला खनन के खिलाफ और जंगलों को बचाने के लिए एक लाख लोगों द्वारा हस्ताक्षर किया गया ज्ञापन प्रधानमंत्री को सौंपेगे और कोयला खनन से जंगलों को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने के लिए कहेंगे.

ग्रीनपीस का कहना है कि कोयला घोटाले की जांच पूरी होने तक प्रधानमंत्री को सभी नए कोयला ब्लॉकों के आवंटन और खदानों की मंजूरी पर रोक लगा देनी चाहिए तथा जिस वन क्षेत्र में खनन नहीं किया जाएगा उसका सही-सही सीमांकन किया जाना चाहिए.


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