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आम आदमी को खत्म करने की चाल

आम आदमी को खत्म करने की चाल

नई दिल्ली. 22 सितंबर 2012

ममता बनर्जी


प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा एफडीआई और गैस-डीजल की बढ़ी हुई कीमतों को तर्कसंगत बताने की कोशिश का तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी ने कड़ा विरोध किया है. ममता बनर्जी ने कहा है कि आम आदमी का नाम लेकर सत्ता का दुरुपयोग किया जा रहा है और आम आदमी को खत्म किया जा रहा है.

गौरतलब है कि एफडीआई और महंगाई को लेकर तृणमूल के सांसदों ने केंद्र सरकार के मंत्रीमंडल से इस्तीफा दे दिया है. इसके बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राष्ट्र को संबोधित करते हुये कहा कि पैसा पेड़ों पर तो लगता नहीं. यदि हम कड़े कदम न उठाते तो वित्तीय घाटा, सरकारी खर्चा खासा बढ़ जाता. निवेशकों का विश्वास भारत में कम हो जाता. वे कतराने लगते और ब्याज की दरें बढ़ जाती.बेरोजगारी भी बढ़ जाती. मनमोहन सिंह ने राष्ट्र के नाम संबोधन में कहा कि बड़े कदम उठाने का समय आ गया है. मुझे आपके विश्वास की जरूरत है, आप उनके बहकावे में न आएँ जो आपको गलत जानकारी देते हैं.

तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मनमोहन सिंह के संबोधन का गहरा प्रतिवाद किया है. ममता बनर्जी ने फेसबुक पर प्रधानमंत्री को लेकर टिप्पणी की है कि आम आदमी की परिभाषा क्या है? लोकतंत्र की परिभाषा क्या है? क्या यह साफ नहीं है कि आम आदमी का नाम लेकर सत्ता का दुरुपयोग किया जा रहा है? आम आदमी को खत्म किया जा रहा है. क्या यह सोची समझी चाल नहीं है?

उधर माकपा ने भी पीएम के भाषण का विरोध किया है. माकपा नेता प्रकाश करात ने कहा है कि प्रधानमंत्री ने उन कदमों के बचाव की कोशिश की है जिनका बचाव करना मुमकिन नहीं है. उनके पास इस सवाल का कोई जवाब नहीं था कि उन्होंने जो कदम उठाए हैं उन पर आगे अमल कैसे करेंगे, जबकि संसद में उनके पास बहुमत ही नहीं है.

इधर भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने प्रधानमंत्री के भाषण पर आक्रोश जताते हुये कहा कि अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने देश को गुमराह किया है. इसमें वो दूसरे देशों के हितों की वकालत करते दिखे न कि भारतीयों के हितों की, जिनका वे नेतृत्व करते हैं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री देश को आर्थिक उदारवाद नहीं बल्कि उधारवाद का संदेश दे रहे थे. देश के चौराहों, चौपालों, खेतों और खलिहानों में विदेशी पूंजी निवेश के खिलाफ चल रही हवा को बदलने के लिए प्रधानमंत्री ने 'डालरी डायलॉग' का सहारा लिया.

जनता दल यूनाइटेड के प्रवक्ता शिवानंद तिवारी ने मनमोहन सिंह के कहे पर सवाल उठाते हुये कहा कि हर व्यक्ति को मालूम है कि पेट्रोल और डीजल का एक बड़ा हिस्सा आयात किया जाता है. लेकिन क्या सरकार बता सकती है कि इनकी खपत कम करने के लिए सरकार ने क्या उपाय किए हैं.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

sanjeev mishra [msanjeev.832@gmail.com] indore - 2012-09-22 05:20:23

 
  श्रीमान प्रधानमंत्री जी ने कहा है की कड़े फैसले लेने का वक्त आ गया है वितीय घाटा बढ रहा है मैं माननीय प्रधान मंत्री जी से पूछना चाहता हूं के आप के शासन काल में जो घोटाले हुए हे उन के लिए माननीय प्रधान मंत्री जी ने क्या कड़े कदम उठये है. अगर माननीय प्रधान मंत्री जी इन घोटालो को हे रोक लेते तो वितीय घाटा नहीं होता वितीय घटे को रोकने के लिए आप ने जो कड़े कदम उठाये हैं हम उस में आप के साथ हे परन्तु घोटाला रोकने के लिए भी कड़े कदम क्यों नहीं उठाते. 
   
 

Pradeep Bhardwaj Kavi [kavi.veer.ras@gmail.com] Modinagar - 2012-09-22 05:10:17

 
  आम आदमी कर दिया, सत्ता ने बेहाल / ममता जी अब हो गईं, सिंहासन पर लाल सिंहासन पर लाल, दुहाई जिसकी देते / रोटी रोज़ी छीन, प्राण उसके ही लेते समझना है नीयत इनकी आज लाज़मी / परिभाषा पूछे लोकतंत्र और आम आदमी. 
   
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